'सिल्वर भी गोल्ड से...', एशियन गेम्स के हीरो हिमाचल के सावन बरवाल से खास बातचीत; बताया 44 साल का सूखा खत्म होने का राज
हिमाचल के जोगिंद्रनगर के सावन बरवाल ने जापान के आइची नगोया में चल रहे एशियन खेल-2026 में पुरुषों की मैराथन ...और पढ़ें

एशियन गेम्स के हीरो हिमाचल के सावन बरवाल। फोटो जागरण
HighLights
सावन बरवाल ने एशियन गेम्स मैराथन में रजत पदक जीता।
उन्होंने 2:11:37 का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया।
भारत को 44 साल बाद इस स्पर्धा में पदक मिला।
जागरण संवाददाता, धर्मशाला। जापान के आइची नगोया में चल रहे एशियन खेल-2026 में शुक्रवार को हिमाचल के जोगिंद्रनगर के रहने वाले सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में रजत पदक जीत लिया। यही नहीं 2:11:37 का समय निकालकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया।
एशियन खेलों में इस इस स्पर्धा में यह मेडल देश को 44 साल के लंबे अर्से के बाद मिला है। अजय अत्री ने सावन बरवाल से बातचीत की।
प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...
सवाल- पहले तो आपको बधाई, 44 साल बाद इन खेलों में पदक आया है। मैराथन की स्पर्धा को बहुत कठिन कहा जाता है। खुद को कैसे फिट रखते हैं?
जवाब- खुश हूं कि देश के लिए कुछ कर सका। जहां तक तैयारी और फिटनेस की बात है तो कोच के कहे मुताबिक हर दिन कई किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है। हर चीज का बहुत ध्याना रखना होता है। अनुशासन बहुत जरूरी है तभी परिणाम निकलते हैं।
सवाल- आपके नाम कई राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय उपलिब्धयां दर्ज हैं। एशियाई खेलों का रजत कितना महत्व रखता है?
जवाब- बहुत ज्यादा, पिछले कई महीनों से एशियाई खेलों की तैयारी कर रहा था। बहुत मेहनत की थी इस पल के लिए। लक्ष्य तो स्वर्ण ही था लेकिन मेरे लिए रजत भी स्वर्ण से कम नहीं।
सवाल- आप दौड़ में काफी समय आगे रहे फिर एकाएक ऐसा क्या हुआ?
खेल में अक्सर ऐसा होता रहता है, खासकर मैराथन में, सेकेंड के सौवें हिस्से में भी परिणाम बदल जाते हैं। मुकाबला कड़ा था लेकिन दिल में यह संतोष है कि भारत की पदक संख्या में इजाफा कर सका।
सवाल- एशियाई खेलों के बाद अब आने वाले लक्ष्य क्या हैं?
जवाब- विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और ओलिंपिक में देश के लिए स्वर्ण जीतना भावी लक्ष्य है। प्रदर्शन का स्तर बना रहा इसी कोशिश में हूं।
सवाल- इस कामयाबी का श्रेय किसे देंगे?
जवाब- पहले तो देशवासियों को जिन्होंने मेरी जीत की दुआएं कीं। मेरी सफलता के पीछे बहुत से लोगों का हाथ है। परिवार और प्रारंभिक कोच गोपाल ठाकुर ने भी मुझे यहां तक पहुंचाने में काफी मदद की और मौजूदा कोच स्काट सीमन को भी इस जीत का श्रेय दूंगा।
