धर्मशाला, जेएनएन। इराक के मोसुल में आतंकियों की ओर से मारे गए युवकों के परिवारों के एक-एक सदस्य को केंद्र सरकार नौकरी देगी। साथ ही पीडि़त परिवारों को मुआवजा भी केंद्र की ओर से दिया जाएगा। मारे गए युवकों के अवशेष भारत लाने में अभी तक कम से कम एक सप्ताह लग सकता है। यह आश्वासन पीडि़त परिवारों को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दिया है। देशभर के 39 युवकों में से चार हिमाचल के थे। सोमवार को पीडि़त परिवारों ने दिल्ली में विदेश मंत्री से मुलाकात की।

इस दौरान धर्मशाला के पासु गांव के अमन, देहरा के भटेहड़ गांव के इंद्रजीत व सुंदरनगर के हेमराज के परिजन भी पहुंचे थे। धमेटा के संदीप के परिजन दिल्ली नहीं गए थे। सुषमा स्वराज ने मृत युवकों के परिजनों के समक्ष संवेदनाएं भी प्रकट कीं। उन्होंने कहा कि औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, इसलिए अवशेष को भारत लाने में कम से कम एक सप्ताह का समय लग सकता है। पासु निवासी अमन के भाई रमन ने बताया कि मंत्री सुषमा स्वराज ने सभी पीडि़त परिवारों केएक-एक सदस्य को नौकरी व मुआवजा देने का

आश्वासन दिया है। 

यह था मामला

पासु का अमन, भटेहड़ का इंद्रजीत, धमेटा का संजीव कुमार व सुंदरनगर के बायला निवासी हेमराज सितंबर 2013 में इराक के लिए रवाना हुए थे। 14 जून, 2014 को चारों की परिजनों के साथ अंतिम बार फोन पर बात हुई थी। इसके बाद आइएस आतंकियों ने बंधक बनाकर उनकी हत्या कर दी थी। हत्या का पता न पर 2014 से बंधकों के परिजन सरकार से उनकी रिहाई की गुहार लगा रहे थे। 2017 में सरकार को इराक में कुछ शव मिले थे और इनकी पहचान के लिए परिजनों के दिसंबर 2017 में डीएनए सैंपल लिए थे। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद 20 मार्च को विदेश मंत्रालय ने सभी युवकों के मारे जाने की पुष्टि की थी।

जल्द लाए जाएंगे अवशेष: जयराम

आइएसआइएस के क्रूर हाथों से मारे 39 भारतीयों में शामिल हिमाचल के चार युवकों के शव जल्द ही अमृतसर पहुंचेंगे। ये शव अलग-अलग ताबूत में लाए जाएंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा में दी। इराक से अमृतसर तक विमान आएगा। इसमें मारे गए युवकों के फोटो और डीएनए रिपोर्ट साथ होगी। वहां से शवों को हिमाचल पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई। कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने केंद्र के प्रयासों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पहले जीवित होने की बात कही थी, लेकिन बाद में जिंदा बचे एक व्यक्ति ने पूरी सच्चाई उगल दी। सीएम ने आशा के बयान को सही नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि मारे गए भारतीयों की पहचान करनी आसान नहीं थी।

 

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