शिमला, अजय बन्याल। कांच की बोतल में एफिल टावर, नौका व महात्मा बुद्ध समेत कई कलाकृतियों ने सबको हैरान कर दिया। बैंटनी कैसल में ग्राम शिल्प मेले के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इन कलाकृतियों को देखकर हैरान हो गए और उन्होंने पूछ ही लिया कि यह कैसे बनाई जाती हैं।

यह काम आसान नहीं है, लेकिन हमीरपुर जिले के गलोड़ क्षेत्र के नारा गांव के करतार सिंह इसमें माहिर हैं। वह बांस की तीलियों से कुछ ही मिनटों में ऐसी कलाकृतियां बना देते हैं। उन्होंने इसका कोई प्रशिक्षण नहीं लिया है। बचपन में ही स्कूल के दिनों इस तरह के काम करते रहते थे जो कि कुछ हट कर होते थे। एनआइटी हमीरपुर में नौकरी शुरू करने की वजह से अपने हुनर का इस्तेमाल करना कम कर दिया।

2005 में वह सुबह घर के साथ ही सड़क में टहल रहे थे। तो खाली कांच की बोतल मिली, जिसे उठा ले आए। उनके दिमाग में आया कि इस बोतल से क्या किया जा सकता था। तब उन्होंने पहली बार बोतल में शिमला के रिज मैदान पर स्थित चर्च को बांस की तीलियों से बनाना शुरू किया। करीब एक माह तक धीरे-धीरे इस कलाकृति को बना दिया। उस समय घर के सदस्य देखकर हैरान हो गए। इसके बाद करतार सिंह ने अपने हुनर को और निखारना शुरू कर दिया। कांच की बोतलों में एफिल टावर, महात्मा बुद्ध, नौका, श्री श्री रविशकंर का बेंगलुरू आश्रम, गन्ने का रस निकालने वाला पुराना बेलना जिसे बैल के माध्यम से चलाया जाता था, ताजमहल समेत ऐसी करीब 150 कलाकृतियां बांस से बना चुके हैं। उन्होंने आज तक एक भी कलाकृति बेची नहीं है। कई लोग खरीदने के लिए आते हैं, लेकिन करतार सिंह इनकार कर देते हैं। उनके मुताबिक पैसा कमाने का नहीं बस ऐसी कलाकृतियां बनाने का शौक है।

सीखने आते हैं कई बच्चे

करतार सिंह हमीरपुर जिला के गलोड़ क्षेत्र के नारा गांव के रहने वाले हैं। एनआइटी में फार्मासिस्ट के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। कई बच्चे इनके पास ये हुनर सीखने के लिए आते हैं। कुछ दिन बाद ही छोड़ कर चले जाते हैं। जो परिश्रम, दिमाग हुनर इस कला में चाहिए उस स्तर का इस्तेमाल बच्चे कर नहीं पा रहे हैं। वह एक म्यूजियम खोलकर उसमें अपनी कलाकृतियां रखना चाहते हैं। उन्हें मलाल है कि सरकार की तरफ से कोई विशेष सहायता नहीं होती है अगर सरकार मंच मुहैया करवाए तो अपने हुनर को दुनिया के समक्ष पेश करेंगे।

शिल्पकारों के उत्पादों को मिलेगा बाजार : जयराम ठाकुर

ग्राम शिल्प मेले से प्रदेश के शिल्पकारों के उत्पादों को बाजार मिलेगा। सरकार ने प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर वीरवार को शिमला के बैंटनी कैसल में भाषा एवं कला संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राज्यस्तरीय ग्राम शिल्प मेले के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि बैंटनी कैसल का 25 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कर पर्यटन के मुख्य आकर्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। ग्राम शिल्प मेले से नई शुरुआत हुई है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न भागों के शिल्पकारों को अपना हुनर दिखाने का अवसर प्राप्त हुआ है। प्रदेश के प्रत्येक जिले की अपनी अलग पहचान है और प्रदेश सरकार शिल्पकारों को उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध करवाने के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाएगी।

राज्य सरकार ने नई योजना ‘आज पुरानी राहों से’ आरंभ करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने भाषा एवं कला संस्कृति विभाग द्वारा तैयार की गई वास्तुकारों की निर्देशिका का भी विमोचन किया। मेला 21 मई तक चलेगा। इस मौके पर भाषा एवं कला संस्कृति विभाग की सचिव डॉ. पूर्णिमा चौहान, निदेशक रुपाली ठाकुर, खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, नगर निगम शिमला की महापौर कुसुम सदरेट, उपमहापौर राकेश शर्मा, उपायुक्त शिमला अमित कश्यप, निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क अनुपम कश्यप, आर्थिक एवं सांख्यकीय विभाग के सलाहकार प्रदीप चौहान, उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र मौजूद रहे।

 

Posted By: Babita