धर्मशाला, जेएनएन : मनोनीत पार्षदों ने नगर निगम के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जनता के पैसों का दुरुपयोग हो रहा है। एक्ट के अनुरूप कार्य नहीं हो रहे हैं, वहीं शहर की व्यवस्थाओं को जनसहभागिता के बिना कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी परियोजना में भी नए क्षेत्रों से भेदभाव हुआ है। धर्मशाला में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में मनोनीत पार्षद ब्रिगेडियर एससी पाठक, जगदीश, र¨जद्र, तेज ¨सह व वीरू राम वालिया ने कहा कि उन्हें शपथ लिए तीन माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम की बैठक नहीं बुलाई गई है। उन्होंने शहर के विकास के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों से तालमेल बैठाने की पहल की, लेकिन किसी का सहयोग नहीं मिला।

इस संबंध में स्थानीय मंत्री के समक्ष भी मामला उठाया गया। उनके परार्मश के बाद ही एमसी अधिकारियों से बातचीत के बाद सफाई व्यवस्था में हो रही अनियमितताओं की जांच की तो पाया कि उक्त कंपनी का टेंडर छह वर्ष कर दिया है। हर माह 16 लाख 53 हजार 800 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। यही नहीं 140 कर्मचारी रखे जाने थे, लेकिन 80 ही कर्मचारी पाए गए। उक्त कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी, उल्टा उसे भुगतान के साथ सेवा अवधि को भी बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में विभिन्न निर्माण कार्यो में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयुक्त और महापौर को लिखित रूप से निवेदन किया था कि कार्य करने और निरीक्षण के लिए जनसहभागिता बढ़ाई जाए। इस संदर्भ में अभी तक मनोनीत पार्षदों को कोई जानकारी नहीं दी गई है। नहीं हुआ वार्ड स्तर पर सभाओं का आयोजन मनोनीत पार्षदों का कहना है कि वार्ड स्तर पर सभाओं का आयोजन नहीं हुआ है।

एक्ट के मुताबिक छह माह में तीन बार बैठक करनी जरूरी है। यदि बैठक न की जाए तो नगर निगम की बैठक में प्रस्ताव पारित कर उन्हें हटाए जाने की कार्रवाई की जा सकती है। यही प्रक्रिया महापौर और उपमहापौर पर भी लागू होती है। यदि कोई तीन बैठकों में लगातार न आए तो सरकार उसे हटा सकती है। नए क्षेत्रों से हुआ भेदभाव एमसी में मर्ज नए क्षेत्रों के लोगों से स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भेदभाव किया है। हालांकि स्मार्ट सिटी के लिए पंचायतों को जोड़कर उन्हें मर्ज तो कर लिया गया, लेकिन स्मार्ट सिटी के तहत पुराने क्षेत्र को ही शामिल किया गया है। स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए नगर निगम प्रतिनिधियों के चुनाव से पहले पस्ताव बनाया था। नए क्षेत्रों में भी स्मार्ट सिटी के तहत कार्य होगा। इसमें सीसीटीवी कैमरे, पार्क, स्मार्ट पोल के अलावा अन्य कार्य होंगे। लेकिन स्मार्ट रोड और स्मार्ट स्ट्रीट नहीं हो पाएंगे। हालांकि इस संबंध में बीओडी ने शहरी विकास मंत्रालय से नए क्षेत्रों में भी स्मार्ट रोड बनाने की मंजूरी मांगी, जो नहीं मिली है।

-दे¨वद्र जग्गी, उप महापौर, नगर निगम धर्मशाला।