यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अच्छी भाषा ही जीवन का धन
भाषा के संस्कार संस्कारशाला अच्छी भाषा के प्रयोग के दम पर ही संस्कार स्कूल, कॉलेजों और समाज में

भाषा के संस्कार
संस्कारशाला
अच्छी भाषा के प्रयोग के दम पर ही संस्कार स्कूल, कॉलेजों और समाज में विकसित किए जा सकते हैं, क्योंकि आदर पूर्ण संस्कार के बिना किसी भी प्रकार का विकास संभव नहीं है। अच्छी भाषा ही जीवन का धन है जो मनुष्य को चाद तक भी पहुंचा सकती है। आज के युग में व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण में भाषा के संस्कार का अपूर्व योगदान है। ऐसे में बच्चों में भाषा के संस्कार को विकसित करना बेहद जरूरी है। भाषा के अभाव में संस्कार संभव नहीं हैं। व्याकरण के सहारे भाषा का निर्माण होता है, लेकिन आज के दौर में युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के प्रचलन के कारण भाषा का प्रयोग शॉर्टकट में करने लग पड़ी है। जो प्रचलन ठीक नहीं है। शुद्ध भाषा ही समाज के संस्कार के विकास की रीढ़ है। ऐसे में युवा पीढ़ी को भाषा का सही प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि शॉर्टकट भाषा की आदत फेसबुक या वाट्सएप में तो काम आ सकती है। लेकिन यही आदत जीवन में भी बन जाती है और इसका नुकसान परीक्षाओं से लेकर कई मंचों पर झेलना पड़ सकता है। ऐसे में शुद्ध भाषा का ही प्रयोग करना चाहिए। क्योंकि भाषा और संस्कार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक के बिना दूसरे का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है। युवा पीढ़ी में संस्कारों की कमी आ रही है। इसका एक बड़ा कारण भी अच्छी शुद्ध भाषा के प्रयोग में शिथिलता ही है। क्योंकि आज सब कुछ शॉर्टकट या एसएमएस की भाषा का प्रयोग हो रहा है। इसलिए संस्कार भी एसएमएस ही बनकर रह गया है। मेरा मानना है कि यदि परिवार, समाज और देश को सकारात्मक दिशा में ले जाना है तो सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
भाषा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम होते हैं। हमें ऐसे कार्यक्रमों के उद्देश्यों को पूरा करना चाहिए, न कि औपचारिकता के रूप में निभाना चाहिए।
- विनय शर्मा, प्रबंध निदेशक विशुद्धा पब्लिक स्कूल बैजनाथ।
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भाषा और संस्कार के बीच अटूट संबंध
भाषा का सीधा संबंध संस्कार और सभ्यता से है। विश्व में जितने भी देश आज अग्रणी हैं वे अपनी भाषा की वजह से हैं, लेकिन हम भाषा के संस्कार भूल रहे हैं। हम अपने देश की भाषा यानी हिंदी को बोलने से कतराते हैं। जबकि हमारे ही कई बड़े नेता अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंचों पर भी हिंदी भाषा में संबोधित करके मिसाल कायम कर रहे हैं। भाषा के संस्कार होना बेहद जरूरी हैं। आज हमसे कई हिंदी तो बोलते हैं, लेकिन हिंदी में ऐसे शब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया गया है, जो मूल भाषा को भटका रही है। भारतीय परंपरा की सही भाषा व संस्कार धीरे-धीरे धूमिल हो रहे हैं। आज भाषा और संस्कार के बीच अटूट संबंध ही नहीं रहा, जिसकी उपेक्षा की जाती है।
समाज कैसा हो, परिवार कैसा हो जीवन में आदर्शो का क्या महत्व है, जीवन किस प्रकार सार्थक बनाया जाए, यह सब तभी संभंव है जब हमारे बीच अच्छी आदर पूर्व भाषा का बोलबाला है।
- अनिल शर्मा, प्रधानाचार्य विशुद्धा पब्लिक स्कूल बैजनाथ।
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'हमें भारत को विश्व का सिरमौर बनाना है तो हमें अपनी हिंदी भाषा को मजबूत करना होगा। इसके लिए हमें भी प्रयास करने चाहिए।'- अक्षय।
'भाषा में संस्कार बेहद जरूरी हैं। बिना भाषा के हमारा विकास नहीं हो सकता है। हम अभी से ही इस दिशा में प्रयासरत हैं।' - प्रिया।
'स्कूल से भी भाषा के संस्कार हमें मिल रहे हैं। क्योंकि बिना भाषा के सही करने से हमारा विकास नहीं हो सकता है। यह बेहद जरूरी है।' -सचिन ठाकुर।
'बच्चा भाषा का संस्कार पहले घर से सीखता है और फिर स्कूल में। इसके लिए जरूरी है कि देश की बुनियादी शिक्षा में हिंदी अनिवार्य हो।' -आशीष
'हम अपनी राष्ट्र और राज्य भाषा को भूलते जा रहे हैं। इसके लिए माता-पिता और आज की शिक्षा पद्धति को ठीक किया जाना बेहद जरूरी है।' - हिमांशु जसवाल
'आज सोशल मीडिया के युग में हम लगातार भाषा में शॉर्टकट मैथड अपना रहे हैं। लेकिन यह आदत पढ़ाई में बेहद खराब हो सकती है। इससे बचना चाहिए।' - मोनिका।
