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5500 मीटर की ऊंचाई पर मिला दुर्लभ हिमालयन स्नो कॉक, हिमाचल वन विभाग ने बढ़ाई चौकसी; कैसा होता है यह पक्षी?

Published: Sat, 24 Oct 2026 10:07 AM (IST)

चंबा के पांगी उपमंडल के बगोटू क्षेत्र में दुर्लभ हिमालयन स्नो कॉक देखा गया है, जो जिले में इसकी पहली ...और पढ़ें

चंबा के पांगी उपमंडल के बगोटू क्षेत्र में दुर्लभ हिमालयन स्नो कॉक देखा गया है (जागरण फोटो)

चंबा के पांगी उपमंडल के बगोटू क्षेत्र में दुर्लभ हिमालयन स्नो कॉक देखा गया है (जागरण फोटो)

HighLights

  1. चंबा के पांगी में दुर्लभ हिमालयन स्नो कॉक दिखा

  2. जिले में इस पक्षी की पहली दस्तावेजी पुष्टि हुई

  3. वन विभाग ने संरक्षण हेतु गश्त और चौकसी बढ़ाई

संवाद सहयोगी, चंबा। जनजातीय उपमंडल पांगी की दुर्गम और बर्फीली वादियों में दुर्लभ वन्य जीवों की चहलकदमी के बाद अब विश्व के सबसे ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ परिंदे हिमालयन स्नो कॉक की मौजूदगी दर्ज की गई है।

वन परिक्षेत्र किलाड़ के अंतर्गत वन बीट प्रेग्रां के तहत आने वाले अत्यधिक ऊंचाई वाले बगोटू क्षेत्र में वन रक्षक तेज सिंह ने नियमित गश्त के दौरान इस पक्षी को कैमरे में कैद किया है। चंबा जिला के ऊंचे पर्वतीय भूगोल में इस पक्षी की मौजूदगी का यह पहला ऐसा ठोस और दस्तावेजी प्रमाण है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी उत्साह भर दिया है।

3000 से 5500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है पक्षी

हिमालयन स्नो कॉक (वैज्ञानिक नाम: टेट्राओगैलस हिमालयेन्सिस) तीतर कुल का सबसे बड़ा और भारी पक्षी है। यह पक्षी आमतौर पर समुद्र तल से 3,000 से 5,500 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई पर रहता है, जहां साल के अधिकांश महीने तापमान शून्य से नीचे रहता है।

 

गर्मियों में यह बर्फ रेखा (स्नो लाइन) के करीब पथरीली ढलानों और अल्पाइन चरागाहों में पाया जाता है। जबकि सर्दियों में भारी हिमपात होने पर थोड़ा नीचे आकर चट्टानी कंदराओं में शरण लेता है। इसका मजबूत शरीर, घने पंख और स्लेटी-सफेद रंग इसे बर्फीली चट्टानों में छलावरण करने में मदद करते हैं, जिससे यह बर्फीले तेंदुओं और शिकारी बाज से अपनी जान बचाता है।

यहां पाया जाता है यह दुर्लभ पक्षी

विश्व स्तर पर यह पक्षी मध्य और दक्षिण एशिया के ट्रांस-हिमालयी पर्वतमालाओं जैसे पामीर, तियान शान, हिंदू कुश, काराकोरम और तिब्बत के पठार में पाया जाता है। भारत में यह मुख्य रूप से लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊपरी क्षेत्रों में सीमित संख्या में देखा जाता रहा है। चंबा जिला के पांगी में बगोटू की खड़ी चट्टानों और बर्फीले ग्लेशियरों का वातावरण इसके अनुकूल पर्यावास साबित हुआ है।

प्रेग्रां बीट के बगोटू क्षेत्र में फील्ड स्टाफ की सजगता से हिमालयन स्नो कॉक की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इतनी ऊंचाई पर इस दुर्लभ पक्षी का नजर आना पांगी घाटी के बेजोड़ वन्यजीव पर्यावास और समृद्ध जैव विविधता का पुख्ता प्रमाण है। इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण के लिए संबंधित बीट गार्ड को नियमित गश्त के निर्देश दिए गए हैं। बर्फीले क्षेत्रों में अवैध शिकार की किसी भी आशंका को रोकने के लिए विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। -नवनाथ माने, डीएफओ वाइल्ड लाइफ चंबा।