संवाद सहयोगी, पांगी : पांगी घाटी जिला चंबा का एक जनजातीय तथा दुर्गम क्षेत्र है। घाटी में बिजली व्यवस्था की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। उस पर विभाग द्वारा बिजली उपलब्ध करवाने के लिए भी दो प्रकार की प्रकिया रखी है। इसमें से एक वीआइपी तथा एक सामान्य श्रेणी शामिल है।

सामान्य श्रेणी के इलाकों में एक दिन कट और एक दिन बिजली की व्यवस्था की है, लेकिन यह व्यवस्था सही ढंग से नहीं चलाई जा रही है। मौसम साफ होने के बावजूद कभी-कभी लगातार दो-तीन दिन सामान्य इलाकों में बिजली कट लगाए जा रहे हैं।

यह समस्या अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ इकाई पांगी के अध्यक्ष बाबूराम शर्मा तथा महासचिव रजनीश सहित अन्य पदाधिकारियों ने आवासीय आयुक्त पांगी के समक्ष रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा मनमाने ढंग से अपनी कालोनी तथा रिश्तेदारों के लिए बिजली की बेहतर व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बिजली बोर्ड के मुख्यालय किलाड़ में स्थानीय कर्मचारियों के गांव व घरों में जैसे कि करोहती, परमस, सेरी भटवास, कवास तथा महालियत इत्यादि में भी बिजली व्यवस्था दुरुस्त है, लेकिन घाटी के अन्य स्थानों पर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सर्दियों के मौसम में बिजली बोर्ड द्वारा यह कहा जाता है कि पानी जमने के कारण बिजली की उत्पादन क्षमता कम हो गई है। मार्च-अप्रैल माह में ग्लेशियर आने के कारण, गर्मियों और बरसात के मौसम में पानी की अधिक क्षमता के कारण पावर हाउस में कीचड़ इत्यादि आने से मशीनें बंद होने का हवाला दिया जाता है।

उन्होंने मांग उठाई कि बिजली कालोनी व विद्युत बोर्ड में कार्यरत कर्मचारियों के रिश्तेदारों की वीआइपी लाइट तुरंत काट दी जाए तथा बराबर एक दिन के अंतराल में बिजली कट लगाए जाएं। बिजली कट का समय दो-तीने घंटे का बनाया जाए, ताकि सभी को बराबर बिजली आपूर्ति मिल सके।

उधर, आवासीय आयुक्त पांगी सुखदेव सिंह राणा का कहना है कि अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का प्रतिनिधिमंडल बिजली की समस्या को लेकर मिला है। उक्त समस्या का समाधान करवाया जाएगा।

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