मणिमहेश यात्रा मार्ग में 7 संवेदनशील स्थल, जहां फूलने लगती हैं श्रद्धालुओं की सांसें; विभाग ने लगाए विशेष मेडिकल कैंप
मणिमहेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए चंबा में 7 विशेष मेडिकल कैंप स्थापित किए गए हैं। ...और पढ़ें

भरमौर से श्री मणिमहेश यात्रा के लिए निकलते श्रद्धालु।
HighLights
यात्रा मार्ग पर 7 विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर स्थापित।
24 घंटे डॉक्टर, ऑक्सीजन, जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध रहेंगी।
हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का तत्काल उपचार मिलेगा।
मिथुन ठाकुर, चंबा। उत्तर भारत की प्रसिद्ध एवं पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान ऑक्सीजन की कमी, सांस फूलने या तबीयत बिगड़ने पर श्रद्धालुओं को घबराने की जरूरत नहीं रहेगी। स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा मार्ग के हर संवेदनशील व महत्वपूर्ण पड़ाव पर सात विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर स्थापित कर स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। इन सभी शिविरों में 24 घंटे डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के साथ छोटे-बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर, जीवनरक्षक दवाएं और फर्स्ट एड किट का पुख्ता स्टॉक पहुंचा दिया गया है, ताकि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी भी श्रद्धालु को तुरंत इमरजेंसी मेडिकल स्पोर्ट मिल सके।
इन जगह पर लगाए मेडिकल कैंप
कठिन चढ़ाई और तेजी से बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मुख्य बेस कैंप हड़सर सहित धनछो, सुंदरासी, गौरीकुंड, पवित्र डल झील परिसर, भरमाणी माता मंदिर तथा होली वाया कलाह ट्रैक पर स्वास्थ्य शिविर पूरी तरह सक्रिय कर दिए हैं। प्रत्येक मेडिकल कैंप में एक योग्य चिकित्सक और दो पैरामेडिकल स्टाफ कर्मी 24 घंटे तैनात रहेंगे।
चढ़ाई पर होती हैं ये समस्याएं
हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, चक्कर आना, उल्टी, हाइपोथर्मिया या सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने पर इन शिविरों में तत्काल आक्सीजन थेरेपी और आवश्यक प्राथमिक उपचार की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।
बन आती है जान तक
हड़सर बेस कैंप से मणिमहेश की दूरी करीब 13 किलोमीटर है। यह खड़ी चढ़ाई व उतराई वाला कठिन मार्ग है। अत्यधिक ऊंचाई होने के कारण मणिमहेश में कई श्रद्धालुओं को सांस से संबंधित समस्या हो जाती है। यहां तक कि कई मरीजों की जान तक चली जाती है। ऐसे में अस्वस्थ श्रद्धालुओं को यात्रा पर न जाने की सलाह दी जाती है। बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविरों के स्थापित होने से काफी राहत मिलेगी।
पांच-पांच दिन के रोटेशन पर तैनात होंगी टीमें, रिजर्व बैकअप
स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यक्षमता और ऊर्जा बनाए रखने के लिए 20 सितंबर तक पांच-पांच दिन के रोटेशन पर टीमों की ड्यूटी लगाई गई हैं। इसके अलावा किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पांच अतिरिक्त मेडिकल टीमें रिजर्व रखी हैं। घायल या गंभीर मरीजों को तुरंत बड़े स्वास्थ्य संस्थान शिफ्ट करने के लिए हड़सर, भरमौर और होली वाया कलाह में 108 एंबुलेंस वाहनों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्रों से भी तुरंत अतिरिक्त एंबुलेंस मंगवाने का विशेष प्लान तैयार है।
मणिमहेश यात्रा मार्ग अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाला है, जहां आक्सीजन का स्तर कम होने से सांस फूलना और थकावट होना स्वाभाविक है। श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और पूरे ट्रैक पर सात मेडिकल कैंपों में आक्सीजन व जीवनरक्षक दवाओं का पूरा प्रबंध कर दिया गया है।
-डॉ. जालम भारद्वाज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंबा।
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