हिमाचल के 3000 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है हिमालयन ताहर, क्या है इसकी खासियत?
हिमाचल प्रदेश में हिमालयन ताहर मध्य और उच्च हिमालयी श्रृंखलाओं में, विशेषकर चंबा के पांगी और भरमौर में पाया जाता है।

हिमालयन ताहर (फाइल फोटो)
HighLights
हिमाचल के मध्य और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है।
3000-4000 मीटर की ऊंचाई पर रहता है, शाकाहारी स्वभाव का।
नर ताहर की गर्दन पर घने, लंबे बाल होते हैं।
जागरण संवाददाता, चंबा। हिमाचल प्रदेश में हिमालयन ताहर मुख्य रूप से मध्य और उच्च हिमालयी शृंखलाओं में पाया जाता है। चंबा में पांगी और भरमौर के ऊपरी क्षेत्रों में पाया जाता है। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (GHNP), कुल्लू: यहां इनकी एक स्वस्थ और संरक्षित आबादी मौजूद है।
हिमालयन ताहर आमतौर पर 3000 मीटर से 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। वयस्क नर ताहर की गर्दन और कंधों पर घने, लंबे बालों का अयाल होता है, जो सर्दियों में गहरा भूरा या तांबई-लाल हो जाता है। यह उन्हें बर्फीली हवाओं से बचाता है और देखने में शेर या जंगली सांड जैसा मजबूत रूप देता है।
नर का वजन लगभग 70 से 90 किलोग्राम होता है, जबकि मादाएं काफी छोटी 35 से 45 किलोग्राम) होती हैं। ये शाकाहारी होते हैं और घास, पत्तियां व झाड़ियां खाते हैं। ये आमतौर पर छोटे झुंडों में रहते हैं और अत्यधिक सतर्क स्वभाव के होते हैं। किसी भी खतरे की आहट पर ये दुर्गम चट्टानों में तेजी से गायब हो जाते हैं।
