संवाद सहयोगी, चंबा : मेडिकल कॉलेज चंबा को प्रदेश सरकार ने फ्री हीमोफिलिक ट्रीटमेंट सेंटर का दर्जा दिया है, ताकि यहा पर हीमोफीलिया के मरीजों का मुफ्त इलाज किया जा सके। लेकिन, आलम यह है कि वर्तमान समय में मेडिकल कॉलेज में हीमोफिलिया के मरीजों को लगाया जाना वाला फैक्टर-9 इंजेक्शन ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों की दिक्कतें बढ़ी हुई हैं।

जिले में वर्तमान समय में हीमोफिलिया बीमारी के कुल चार मरीज हैं। ये चारों उपमंडल चुराह के हैं। इनमें से दो मरीज हीमोफिलिया की ए श्रेणी में आते हैं व दो मरीज बी श्रेणी के हैं। सबसे अधिक दिक्कत बी श्रेणी के मरीजों को आ रही है।

यह इंजेक्शन विदेश से मंगवाने पड़ते हैं। एक इंजेक्शन की कीमत करीब 50 हजार तक होती है। लेकिन, हीमोफीलिया फेडरेशन ऑफ इंडिया इसे निशुल्क प्रदान करती है। इस बीमारी से पीड़ित दो भाई संदीप व मुकेश निवासी गाव खिल डाकघर चरडा तहसील चुराह के रहने वाले हैं। स्वजनों का कहना है कि इंजेक्शन न लगने के कारण उनके जोड़ों में सूजन व दर्द शुरू हो गया है, जो कि इनके शरीर के जोड़ों में अंदरूनी जख्म बनने व खून निकलने का संकेत है। जब ये बच्चे दर्द से चिल्लाते हैं तो पूरा परिवार बेबस होकर रह जाता है। दो-दो दिन तक इनके घर में खाना नहीं बनता। दर्द से राहत के लिए इन्हें दर्द निवारक दवा देते हैं पर उसका असर कुछ पल के लिए ही रहता है।

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क्या है हीमोफीलिया बी

हीमोफीलिया एक सबसे पुराने जेनेटिक रक्तस्त्राव रोग में से एक है। इस बीमारी में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में कोई छोटी चोट लगने पर भी रोगी को काफी देर तक रक्तस्त्राव होता रहता है। खासतौर हीमोफीलिया के रोगियों में घुटनों, टखनों और कोहनियों के अंदर होने वाला रक्तस्त्राव अंगों और ऊत्तकों को भारी नुकसान पहुंचाता है। एक समय पर बेहद खतरनाक माने जाने वाले इस रोग से पीड़ित रोगी आज लगभग सामान्य उम्र तक जीवन जी सकते हैं। हालाकि अभी पूरी तरह से इस रोग का उपचार संभव नहीं हुआ है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा हीमोफीलिया के प्रभावी उपचार में काफी प्रभावी है।

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हीमोफीलिया रोग से संबंधित फैक्टर-9 मंगवाने के लिए छह जगह से अनुमति लेनी पड़ती है। इस इंजेक्शन को मंगवाने के लिए इसकी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। साथ ही इस बारे में पत्र लिख दिया गया है। जल्द ही इंजेक्शन मंगवा लिए जाएंगे।

-डॉ. मोहन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक मेडिकल कॉलेज चंबा।

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चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की लापरवाही आई सामने

चुराह के सामाजिक कार्यकर्ता विपिन राजपूत ने कहा कि चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की लापरवाही की वजह से अब फेडरेशन भी फैक्टर-9 की सप्लाई नहीं भेज रही है, क्योंकि यह कार्यालय उनके द्वारा बताए निर्देशों अनुसार कागजी कार्रवाई को पूरा नहीं कर रहा है। पहले भी मेरा संपर्क इस बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए काम करने वाली संस्था हीमोफीलिया फेडरेशन ऑफ इंडिया से हुआ था, जिनके माध्यम से मैं लगभग डेढ़ साल तक अस्पताल में ये फैक्टर स्वयं उपलब्ध करवाता रहा। अब यह सारी जिम्मेवारी चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की है। बीच में टाडा से भी एक बार इस की आपूर्ति की गई थी।

Posted By: Jagran

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