विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल के ऐतिहासिक चंबा शहर पर भूस्खलन का संकट, ड्रोन सर्वे में मिले 7 संवेदनशील इलाके; 270 मकानों के ढहने का खतरा

Published: Wed, 09 Sep 2026 08:00 AM (IST)

चंबा शहर पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है, ड्रोन सर्वेक्षण में सात अति संवेदनशील स्थान और लगभग 270 मकान खतरे की जद में पाए गए हैं।

चंबा के मकानों को भूस्खलन का खतरा (फाइल फोटो)

चंबा के मकानों को भूस्खलन का खतरा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ड्रोन सर्वेक्षण में चंबा के सात अति संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र चिन्हित

  2. शहर के छह वार्डों में लगभग 270 मकान भूस्खलन की जद में

  3. आधुनिक तकनीक से सुरक्षा हेतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनेगी

सुरेश ठाकुर, चंबा। एक हजार वर्ष पुराने ऐतिहासिक चंबा शहर की पहाड़ियों के भीतर छिपा खतरा अब ड्रोन सर्वेक्षण में सामने आ गया है।

लगातार भूस्खलन की घटनाओं से जूझ रहे शहर में प्रशासन और नगर परिषद ने पहली बार तकनीकी सर्वेक्षण करवाकर उन स्थानों की पहचान की है, जहां आने वाले समय में भूस्खलन बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। ड्रोन सर्वेक्षण में शहर के सात स्थानों को अति संवेदनशील पाया गया है।

शहर के छह वार्डों में करीब 270 मकान भूस्खलन के खतरे की जद में बताए जा रहे हैं। इनमें अकेले चौगान वार्ड के करीब 100 मकान शामिल हैं। हटनाला और जनसाली क्षेत्र में 80 मकानों पर खतरा है। इसके अलावा सुल्तानपुर वार्ड के हेलीपैड व भट्टी नाला क्षेत्र में करीब 30 मकान, हरदासपुरा वार्ड के मुगला और कसाकड़ा वार्ड के करीब 60 मकान भी खतरे के दायरे में हैं।

अब इन्हीं स्थानों को सुरक्षित करने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित डीपीआर तैयार की जाएगी। जिला प्रशासन और नगर परिषद ने चंबा शहर को भूस्खलन से सुरक्षित करने की दिशा में कदमताल शुरू कर दी है।

मुंबई से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने किया सर्वेक्षण

खतरे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर परिषद ने मुंबई से नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) कंपनी के वरिष्ठ इंजीनियरों को बुलाया।

विशेषज्ञों ने नगर परिषद अधिकारियों के साथ मिलकर ड्रोन के माध्यम से शहर के संवेदनशील हिस्सों का सर्वेक्षण किया। इस दौरान पहाड़ियों की स्थिति, भूस्खलन वाले हिस्सों, मकानों की स्थिति और संभावित खतरे समेत विभिन्न पहलुओं का तकनीकी आकलन किया गया। ड्रोन से मिले आंकड़े अब शहर को सुरक्षित करने की आगामी योजना का आधार बनेंगे। डीपीआर को मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार के पास भेजा जाएगा।

इन स्थानों पर भूस्खलन का सबसे अधिक खतरा

1. कसाकड़ा मोहल्ला: कैफे रोड के नीचे का क्षेत्र।
यहां बरसात के दौरान पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने की समस्या रहती है। खतरा बढ़ने पर लोगों को घरों से बाहर निकलकर रात सुरक्षित स्थानों पर गुजारनी पड़ती है।

2. चौगान वार्ड: गेस्टहाउस से उपायुक्त आवास तक
चौगान वार्ड के अंतिम छोर से चंबा गेस्टहाउस होते हुए उपायुक्त आवास तक का क्षेत्र भूस्खलन से प्रभावित है। बरसात में कई परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ता है।

3. पक्काटाला: सुरक्षा कार्य के बावजूद संवेदनशील हिस्सा
पहाड़ी के एक हिस्से में कंक्रीट स्प्रे की गई है लेकिन दूसरा हिस्सा अभी भी संवेदनशील है। यहां स्थायी सुरक्षा उपाय की जरूरत है।

4. हटनाला-जनसाली: पहाड़ी के अंतिम छोर का क्षेत्र
यहां पहाड़ी के नीचे लगातार भूस्खलन हो रहा है। करीब दो मकानों पर सीधा खतरा बताया गया है। समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं हुए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

5. सुल्तानपुर वार्ड: हेलीपैड व भट्टी नाला क्षेत्र
पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण यह क्षेत्र लगातार संवेदनशील बना हुआ है। अब तक 20 से अधिक हादसे होने की बात सामने आई है और कई लोग घायल हो चुके हैं। क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर स्थायी योजना की जरूरत है।

चंबा शहर की संवेदनशील पहाड़ियों का ड्रोन सर्वेक्षण तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। इससे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की सटीक मैपिंग और जोखिम का वैज्ञानिक आकलन होगा। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर आधुनिक तकनीक से स्थायी सुरक्षा उपायों की डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी। -राखी कौशल, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद चंबा।

6. हरदासपुरा वार्ड : मुगला मोहल्ला, रावी साइट
रावी की ओर पहाड़ी का हिस्सा लगातार खिसक रहा है। इससे आसपास के कई मकानों पर खतरा बना हुआ है। ड्रोन से यहां पहाड़ी और जमीन की स्थिति का तकनीकी आकलन किया गया।

7. कसाकड़ा वार्ड का प्रभावित हिस्सा
कसाकड़ा क्षेत्र के प्रभावित हिस्से को भी ड्रोन सर्वेक्षण में विशेष रूप से देखा गया है। यहां भूस्खलन और पत्थर गिरने की समस्या को देखते हुए स्थायी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता सामने आई है।

डीपीआर बताएगी, कैसे बचेगा ऐतिहासिक शहर

ड्रोन सर्वेक्षण के बाद सबसे बड़ी चुनौती इन सात अति संवेदनशील स्थानों को सुरक्षित करने की है। प्रशासन और नगर परिषद अब तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर तैयार करेंगे। इसमें पहाड़ियों को स्थिर करने, भूस्खलन रोकने और प्रभावित आबादी की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक से किए जाने वाले कार्यों का खाका तैयार होगा।


ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की वैज्ञानिक मैपिंग की गई है। विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर जोखिम का आकलन कर प्राथमिकता तय की जाएगी। नियमानुसार विस्तृत डीपीआर तैयार कर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त कर स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
-मुकेश रेप्सवाल, उपायुक्त चंबा।