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चंबा के पहाड़ों में छिपा खनिज खजाना, 57 करोड़ साल पुराने पत्थर मिले; वैज्ञानिकों को वैनेडियम के होने की संभावना

Published: Sat, 24 Oct 2026 10:02 AM (IST)

चंबा की पहाड़ियों में 57 करोड़ साल पुरानी चट्टानें मिली हैं, जिनमें वैनेडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की संभावना पर वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. चंबा में 57 करोड़ साल पुरानी चट्टानें मिलीं।

  2. वैज्ञानिक वैनेडियम जैसे खनिजों की संभावना तलाश रहे।

  3. प्रदर्शनी में प्राचीन चट्टानों और खनिज नमूनों का प्रदर्शन।

सुरेश ठाकुर, चंबा। जिस पत्थर को देखकर लोग अक्सर बिना रुके आगे बढ़ जाते हैं, उसी में धरती के करोड़ों वर्षों पुराने इतिहास के रहस्य छिपे हो सकते हैं। चंबा की पहाड़ियों से प्राप्त लगभग 570 मिलियन वर्ष यानी 57 करोड़ वर्ष पुरानी बताई जा रही चट्टानें आज वैज्ञानिकों के शोध का विषय बनी हुई हैं। ऐतिहासिक चौगान में आत्मनिर्भर भारत की तीन दिवसीय विशाल प्रदर्शनी में इन चट्टानों के नमूनों ने लोगों और विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ा दी है।

इनकी खासियत केवल इनकी प्राचीनता नहीं, बल्कि इनके भीतर मौजूद खनिजों की संभावनाएं भी हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के छह विशेषज्ञ पिछले दो वर्षों से चंबा के विभिन्न क्षेत्रों में वैनेडियम की संभावनाओं को लेकर शोध कर रहे हैं।

चट्टानों की जांच जारी है और वैज्ञानिक परीक्षणों के परिणामों से ही इनकी वास्तविक खनिज संपदा का पता चल सकेगा। इस तीन दिवसीय विशाल प्रदर्शनी के दूसरे दिन हिमावल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता और 25 अक्तूबर को कांगड़ा चम्बा संसदीय क्षेत्र से सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित रहेगें।

57 करोड़ साल पुरानी चट्टानें, भविष्य की संभावनाओं पर नजर

प्रदर्शनी में कैला क्षेत्र से प्राप्त चट्टानों के नमूने विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। लगभग 570 मिलियन वर्ष पुरानी बताई जा रही इन चट्टानों की भूगर्भीय संरचना वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

इनका अध्ययन धरती के प्राचीन इतिहास के साथ-साथ खनिजों की उपस्थिति और उनके संभावित संकेंद्रण को समझने में मदद कर सकता है। कैला चकोली, कुठेड़ और माणी से आगे भदल क्षेत्र में प्राप्त चट्टानों के नमूनों का अध्ययन किया जा रहा है।

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इनमें कार्बनयुक्त फिलाइट विशेष महत्व रखता है। फिलाइट एक रूपांतरित चट्टान है, जो ताप और दबाव के प्रभाव से बनती है। कुछ कार्बनयुक्त भूगर्भीय संरचनाओं में वैनेडियम जैसे तत्वों का संकेंद्रण हो सकता है। इसी संभावना की वैज्ञानिक जांच की जा रही है।

तांबे के नीले-हरे खनिजों की अनोखी पहचान

प्रदर्शनी में मैलाकाइट, एजुराइट और क्राइसोकोला जैसे तांबा युक्त खनिजों के नमूने भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मैलाकाइट हरे, एजुराइट गहरे नीले और क्राइसोकोला नीले-हरे रंग के लिए पहचाना जाता है। इन खनिजों का अध्ययन क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना और तांबे की संभावित उपस्थिति को समझने में उपयोगी हो सकता है।

वैनेडियम क्यों है महत्वपूर्ण?

वैनेडियम का उपयोग मजबूत मिश्रधातु इस्पात और ऊर्जा भंडारण की कुछ आधुनिक तकनीकों में किया जाता है। वैनेडियम आधारित प्रवाह बैटरियां बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण में उपयोगी हैं।

ऐसे में चंबा की चट्टानों में इस तत्व की संभावनाओं का अध्ययन वैज्ञानिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, वास्तविक उपयोगिता खनिज की मात्रा, गुणवत्ता और उत्खनन की व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी।

पन्ना की किम्बरलाइट भी बनी आकर्षण

प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के हिनौता से प्राप्त लगभग 1500 मिलियन वर्ष पुराना बताया गया किम्बरलाइट का नमूना भी रखा गया है। किम्बरलाइट एक आग्नेय चट्टान है, जो कुछ भूगर्भीय परिस्थितियों में हीरे की खोज के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।