संवाद सहयोगी, बिलासपुर : डीजल व पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर निजी बस परिवहन के संचालक सरकार से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं लेकिन जनता इस फैसले के विरोध में है। आम जनता किसी भी तरह से किराये बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। आमजनता का मानना है कि यदि सरकार एक साथ लोकल किराये में तीन गुना वृद्धि करती है तो इसका प्रभाव सीधा गरीब की जेब पर पड़ेगा।

---------------------

सिहड़ा के रामलाल का कहना है कि सरकार यदि किराये में वृद्धि करती है तो इसका प्रभाव गरीब जनता पर ही पड़ेगा। सरकार को लोकल किराए में वृद्धि नहीं करनी चाहिए।

---------------------

बंदला की रमा देवी का कहना है कि निजी बस संचालकों को हड़ताल नहीं करनी चाहिए। इससे सबसे अधिक गरीब जनता का जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा। सरकार को गरीब लोगों के हित को देखते हुए निर्णय लेना चाहिए।

-----------------------

सरकाघाट की रजनी देवी का कहना है कि बसों की हड़ताल गलत है। लोकल किराये में एक या दो रुपयेए वृद्धि की जा सकती है। दस रुपये लोकल किराया करना सही फैसला नहीं होगा।

-----------------------

ऋषिकेश के लेखराम का कहना है कि किराये की बढ़ोतरी किसी भी तरह सहन नहीं की जाएगी। इससे गरीब आदमी का जीना दुश्वार हो जाएगा। मजदूरी करने वाला एक आदमी लोकल दस रुपये ा किराया कैसे देगा।

-----------------------

राजकुमार का कहना है कि निजी बस संचालकों की हड़ताल से जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा। कई ऐसे रूट हैं जहां केवल निजी बसें ही चलती हैं। ऐसे में लोगों को कार्यालय में पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।

--------------------

बड़ोल देवी की अनु देवी का कहना है कि किराए में वृद्धि करने का निर्णय सही नहीं है। सबसे अधिक कालेज पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावको पर पड़ेगा। सरकार को गरीब लोगों का पक्ष देखकर ही निर्णय लेना चाहिए।

Posted By: Jagran