जागरण संवाददाता, बिलासपुर : पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं नयनादेवी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामलाल ठाकुर ने कहा कि सोमवार को मुख्यमंत्री बिलासपुर में कोविड-19 और सूखे के चलते समीक्षा बैठक जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ करके गए। मुख्यमंत्री सारी जिम्मेदारियां आशा वर्करों के सहारे छोड़ने की भी बात कर गए, लेकिन यह नहीं बताया कि आशा वर्कर्स के लिए सुरक्षा का कवच क्या होना चाहिए। अच्छा होता कि मुख्यमंत्री जिला के अस्पतालों में दिए गए वेंटीलेटर्स पर भी कुछ टिप्पणी कर देते कि प्रदेश में जिलावार कितने दिए गए हैं और वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है। इस बारे में मुख्यमंत्री ने चुप्पी क्यों साध रखी है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री जिला बिलासपुर और पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन की क्या स्थिति है उसके बारे में भी कुछ बोल देते तो बेहतर होता। लोगों में उत्साह भी बढ़ता, लेकिन प्रदेश में कोविड-19 को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं का टोटा महसूस हो रहा है।

जारी प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में और जिला मुख्यालय में ही मेडिकल स्टाफ, पैरा मेडिकल स्टाफ का टोटा पड़ा हुआ है तो ऐसे में समीक्षा बैठक का क्या औचित्य रह जाता है। होना तो यह चाहिए कि कोरोना पॉजिटिव के घर एक ऑक्सीमीटर की व्यवस्था की जानी आवश्यक है, क्योंकि अब सभी कोरोना मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है। अगर ऐसे में किसी मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरता है तो उसका पता घर पर ही लग सके। ऐसा होने पर उसे तुरंत अस्पताल में शिफ्ट करवाकर ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा सकती है। ऐसा करने पर मरीज को लाइफ स्पोर्ट सिस्टम पर रखा जा सकता है।

रामलाल ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री की केवल समीक्षा बैठकों से काम नहीं चलने वाला, वर्तमान में जो वेंटीलेटर अस्पतालों के पास हैं उनको चलित अवस्था में लाया जाना अति आवश्यक है। प्रदेश में ऑक्सीजन के जो नए चार प्लांट लगने हैं, उनमें ऑक्सीजन का उत्पादन एक माह के अंदर शुरू किया जाए, तब कहीं जाकर कुछ स्वास्थ्य सिस्टम में सुधार हो पाएगा, कोरी बैठकों से काम नहीं चलने वाला है।

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