लाल चंद, स्वारघाट

आजादी के बाद भी स्वारघाट के साथ सटे तथा जिला सोलन के अंतिम छोर पर बसे रजवाहन गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इस गांव में लगभग 50 परिवार गुजर बसर कर रहे है। 500 की जनसंख्या वाले इस गांव के लिए सड़क तो दूर की बात पैदल चलने के लिए ढंग के रास्ते नहीं है। प्राथमिक शिक्षा रंढाला व भीनी जोहड़ी में हासिल करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाहा या नंड जाना पड़ता है। दोनों ही स्कूल लगभग आठ-आठ किलोमीटर दूर हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं का भी बुरा हाल है। यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे चारपाई पर उठा कर मुख्य सड़क मार्ग तक लाना पड़ता है। सरकार को इस गांव को सुविधाओं से लैस करना चाहिए

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राजेश कुमार का कहना है कि लोग आज भी विकास की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पाए हैं। मरीजों को आज भी पालकी में बैठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है।

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राम¨सह का कहना है कि नेताओं ने इस गांव को केवल वोट बैंक समझ रखा है लेकिन सुविधाएं न होने के समान हैं। इसलिए सरकार को इस गांव तक सुविधाएं पहुंचानी चाहिए।

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रोशन लाल का कहना है कि दुनिया रजवाहन में बीमार को चारपाई पर उठा कर मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है। गांव के लिए सड़क तो दूर की बात पैदल चलने के लिए रास्ता नहीं है।

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चमन लाल का कहना है कि बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए जंगली रास्तों से गुजर कर लगभग आठ किलोमीटर दूर तक पैदल जाना पड़ता है। इससे उन्हें बच्चों की चिंता लगी रहती है।

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कुलदीप ¨सह का कहना है कि उक्त सड़क का काम रंडाला के पास लोगों ने रोक दिया। इसके बाद इस सड़क के काम को शुरू करने के लिए किसी भी स्तर पर प्रयास नहीं हुए।

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राम रत्न का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल है। डिस्पेंसरी में सरकार डॉक्टर की तैनाती करना भूल गई। स्वास्थ्य लाभ के लिए लोग 15 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं।

Posted By: Jagran