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कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर स्पीड लिमिट बढ़ने से होगी डेढ़ घंटे की बचत, 25 प्रतिशत घटेगा सफर का समय

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 03 Sep 2026 07:03 PM (IST)Updated: Thu, 03 Sep 2026 07:07 PM (IST)

कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 60 से बढ़कर 80 किमी/घंटा हो गई है। इससे यात्रा का समय 25% कम होगा और डेढ़ घंटे की बचत होगी।

कीरतपुर-मनाली हाईवे पर स्पीड लिमिट बढ़ाने की तैयारी है।

कीरतपुर-मनाली हाईवे पर स्पीड लिमिट बढ़ाने की तैयारी है।

HighLights

  1. गति सीमा 60 से बढ़कर 80 किमी/घंटा हुई।

  2. यात्रा समय में 25% की कमी, डेढ़ घंटे की बचत।

  3. विशेषज्ञों ने सुरक्षा उपायों के साथ फैसले का स्वागत किया।

जागरण संवाददाता, बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले वाहन चालकों और पर्यटकों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। इस मार्ग पर अब वाहनों की अधिकतम गति सीमा (स्पीड लिमिट) 60 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़कर 80 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के इस फैसले से जहां ड्राइवरों को रफ्तार का फायदा मिलेगा, वहीं यात्रा के समय में करीब 25 प्रतिशत की सीधी कमी आएगी।

वर्तमान में कीरतपुर से मनाली तक की कुल दूरी लगभग 195 किलोमीटर है। 60 किमी/घंटा की गति सीमा और जगह-जगह लगे ट्रैफिक नियमों की सख्ती के कारण इस दूरी को तय करने में वाहन चालकों को पांच से साढ़े पांच घंटे का समय लग जाता था।

मार्ग पर सुरक्षा व निगरानी के लिए जगह-जगह इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम कैमरे स्थापित किए गए हैं, जो निर्धारित सीमा से अधिक स्पीड होने पर सीधे ऑनलाइन ओवरस्पीडिंग का चालान काट देते हैं। हालांकि, गति सीमा में 20 किमी/घंटा का इजाफा होने से अब यह दूरी मात्र चार से साढ़े चार घंटे में आसानी से पूरी की जा सकेगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

फोरलेन पर गति सीमा बढ़ाने के इस फैसले का विषय-विशेषज्ञों ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा बदलावों की वकालत भी की है। लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता रंजन कुमार गुप्ता का कहना है कि वर्तमान में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक वाहनों की तकनीक को देखते हुए गति सीमा बढ़ाना बेहद व्यावहारिक और जरूरी फैसला था। इससे न केवल यात्रियों के समय की बचत होगी, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलेगी।

गति सीमा का यह नियम हर मौसम और हर परिस्थिति में एक समान लागू नहीं होना चाहिए। विशेष रूप से मानसून के दौरान स्पीड लिमिट में कमी की जानी चाहिए।

संवेदनशील और भूस्खलन संभावित क्षेत्र 

फोरलेन पर कई ऐसे भूस्खलन संभावित क्षेत्र हैं, जहां अक्सर पहाड़ियों से दरकते पत्थरों का खतरा बना रहता है। ऐसे स्थानों पर गति सीमा नियंत्रित रखना ही सुरक्षित होगा।

मार्ग की मौजूदा स्थिति

फोरलेन पर कई स्थानों पर अभी भी निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा है। तेज रफ्तार में अचानक खराब सड़क सामने आने से बड़े हादसे का जोखिम रहता है।

जंक्शन और इंटरसेक्शन मैनेजमेंट

जिन इलाकों में हाईवे से अन्य स्थानीय सड़कें जुड़ती हैं (जंक्शन/क्रॉसिंग), वहां गति सीमा 80 की जगह काफी कम रखनी होगी और अत्यधिक साइन बोर्ड व वार्निंग सिग्नल लगाने होंगे।

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