नीचे मछली, ऊपर बिजली... हिमाचल में शुरू हुई ऐसी योजना; आप भी करेंगे तारीफ
मत्स्य विभाग ने 'नीचे मछली, ऊपर बिजली' योजना शुरू की है, जिससे फार्मों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल कम होंगे और अतिरिक्त ऊर्जा बेची जा सकेगी।

नीचे मछली, ऊपर बिजली योजना से रोशन होंगे मत्स्य फार्म। एआई जेनरेटेड तस्वीर।
HighLights
मत्स्य विभाग की 'नीचे मछली, ऊपर बिजली' योजना शुरू
सोलर पैनल से फार्मों का बिजली बिल बचेगा
अतिरिक्त बिजली बेचकर विभाग राजस्व अर्जित करेगा
जागरण संवाददाता, बिलासपुर। मत्स्य विभाग ने अपनी लगातार बढ़ती वित्तीय देनदारियों को कम करने और प्रदेश में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अभिनव योजना 'नीचे मछली, ऊपर बिजली' का आगाज किया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के लागू होने से न केवल विभाग को हर महीने लाखों रुपये के बिजली बिल से निजात मिलेगी, बल्कि जरूरत से ज्यादा बिजली उत्पादन होने पर उसे राज्य ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। वर्तमान में प्रदेश भर में मत्स्य विभाग के कुल 31 फार्म संचालित हो रहे हैं।
इनमें 14 कार्प मछली के फार्म हैं, जबकि 17 फार्म ठंडे पानी की लोकप्रिय ट्राउट मछली के हैं। मछली पालन की प्रक्रिया में तालाबों के भीतर आक्सीजन का स्तर बनाए रखने और पानी के निरंतर प्रवाह के लिए हाई-पावर मोटरों को दिन-रात चलाना पड़ता है। इसके अलावा फार्म परिसरों और कार्यालयों में अन्य बिजली उपकरणों की भारी खपत होती है।
इस निरंतर संचालन के कारण औसतन प्रति फार्म हर महीने करीब 30 हजार रुपये का बिजली बिल आता है। इस प्रकार पूरे प्रदेश के सभी फार्मों को मिलाकर विभाग को हर माह 9 से 10 लाख रुपये केवल बिजली बिल के भुगतान पर ही खर्च करने पड़ते थे।
अलसू फार्म से हुई सफल शुरुआत
बिजली पर होने वाले इस भारी-भरकम खर्च को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए विभाग ने अपने सभी 31 फार्मों में सोलर पैनल स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस योजना का पहला चरण मंडी जिले के अलसू स्थित मछली फार्म में शुरू किया गया है, जहां सोलर पैनल पूरी तरह स्थापित किए जा चुके हैं।
अलसू में इसके बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, जहां अब फार्म की सभी मोटरें और कार्यालयी काम पूरी तरह सौर ऊर्जा से चल रहे हैं। योजना का सबसे बेहतरीन पहलू यह है कि जिन फार्मों में खपत से अधिक सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा, उसे नेट मीटरिंग के जरिए सीधे बिजली बोर्ड के राज्य ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा। इससे विभाग न केवल बिजली में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि एक उत्पादक के रूप में भी उभरेगा।
विभाग के तहत एक बार का निवेश विभाग को आने वाले वर्षों तक लगातार बचत और लाभ देगा। अलसू फार्म में इसका सफल ट्रायल पूरा हो चुका है, और इसी माडल को आधार बनाकर जल्द ही प्रदेश के शेष सभी 30 फार्मों को भी सोलर पैनल से कवर कर दिया जाएगा। -ओमकांत ठाकुर, निदेशक, मत्स्य विभाग।
