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बिलासपुर, जेएनएन। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का शिकार हुए गाहर पंचायत के रणजीत सिंह को दो वर्ष बाद भी न्याय नहीं मिला है। गाहर पंचायत निवासी 52 वर्षीय रणजीत सिंह ने 1998 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भराड़ी में परिवार नियोजन ऑपरेशन करवाया था। लेकिन 2017 में उसकी पत्नी दोबारा गर्भवती हो गई। वह दिहाड़ी लगाकर अपना व परिवार का पालन पोषण करता है। उसने स्वास्थ्य विभाग से न्याय की गुहार लगाई लेकिन नहीं मिला। अब वह न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से उन्हें मानसिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। वे गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। गर्भवती होने के कारण पत्नी को सदमा लगा है। इससे उसका स्वास्थ्य खराब रहने लगा है। डॉक्टरों की सलाह पर डिलीवरी करवाई। वहां उन्हें 15 दिन तक रहना पड़ा। उसने 30 हजार रुपये उधार लेकर खर्च चलाया। 28 नवंबर 2017 को पत्नी ने बच्‍चे को जन्म दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की लेकिन आज तक आश्वासन ही मिले हैं।

रणजीत सिंह ने बताया उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था कि वह मजदूरी व आइआरडीपी के तहत मिलने वाले राशन से परिवार का पालन पोषण कर रहा है। उसकी पत्नी 10 वर्ष से मानसिक रूप से परेशान है। उसके इलाज पर हजारों रुपये खर्च कर चुका है। उसे यही चिंता सता रही है दो बेटों का पालन-पोषण व इनकी पढ़ाई-लिखाई कैसे करवा पाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री व उपायुक्त बिलासपुर को अवगत करवाने के बावजूद उसे आर्थिक मदद नहीं दी गई। तीन मार्च को गाहर पंचायत में हुए जनमंच कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा के समक्ष भी न्याय की गुहार लगाई गई थी लेकिन उन्होंने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

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