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बिलासपुर, जेएनएन। करोगे योग तो रहोगे निरोग...यह कहावत आमतौर बुजुर्ग लोगों से सुनने को मिलती है। लेकिन दौड़ धूप भरी जिंदगी में कई लोगों के पास अपने लिए समय ही नहीं है। इस कारण वे शरीर का पूरा ध्यान नहीं रख पा रहे हैं और बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। समय के साथ लोग जागरूक हो रहे हैं। वे

शरीर को बीमारियों से दूर करने के लिए वे अलग-अलग क्रियाएं अपना रहे हैं। इनमें पार्क में सुबह-शाम घूमना, जिम में जाकर कसरत करना व योग की क्रियाएं करना शामिल है। बिलासपुर में पर्याप्त योग केंद्र नहीं हैं। इस कारण लोग योग से संबंधित अधिक जानकारी नहीं ले पा रहे हैं। वे टीवी के माध्यम से योग क्रियाएं कर रहे हैं। इसका असर भी दिख रहा है।

 

योग विशेषज्ञ डॉ. संदीपा का कहना है योग करने के कुछ नियम होते हैं। इनका पालन करना जरूरी है। रोग ग्रस्त व स्वस्थ व्यक्ति के लिए अलग-अलग योग की क्रियाएं हैं। यह भी पता होना चाहिए किस बीमारी में कौन सा योग करना चाहिए और कौन सा नहीं। टीवी में यह सब नहीं सिखाया जाता है। इसका उल्टा असर पड़ता है। लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। इस कारण वे शरीर को बीमारियों से दूर रखने के लिए योग को अपना रहे हैं। कई लोग टीवी के माध्यम से या किसी के कहने पर योग करना शुरू कर देते हैं, जो सही नहीं है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में शुक्रवार को योग शिविर लगाया जाता है। इसमें लोग योग की क्रियाएं सीख सकते हैं या किसी प्रशिक्षिक से जानकारी लेने के बाद योग सीख सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को योग नहीं करना चाहिए।

योग के नियम

योग की आठ क्रियाएं हैं। इनमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान वल समाधी शामिल हैं। योग सुबह खाना खाने से पहले या शौच जाने के बाद करना चाहिए। कुछ लोग खाना खाने के बाद योग की क्रियाएं करते हैं, जो स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालती हैं।

बच्चों को  कराएं योग

आठ साल के कम उम्र के बच्चों को खेल खेल में करने वाले योग कराएं।  जैसे कि अधोमुखसवासन, सशंकासन, भुजगासन आदि हैं। इन्हें ये बच्‍चे आसानी से कर लेंगे।  वहीं आठ साल की उम्र के ऊपर के बच्‍चों को सूर्यनमस्‍कार जैसे योग कराने से लाभ होता है। जैसे जैसे वे आगे बढ़ेंगे वे इसका कांन्सेप्ट समझते जाएंगे।  सबसे पहले बच्‍चों को हर एक आसान के बारे में बताएं उसके फायदे समझाएं औ फिर उन्‍हें उसी तरीके से करना सिखाएं। इससे बच्चों में एनर्जी का संचार काफी तेजी से होगा।  ध्यान रखें कि 6 साल से 11 साल के बीच के बच्‍चों को योग म्यूजिक, गेम, आदि के साथ कराएं।  जिससे उनकी बॉडी और मांइड दोनों ही इंप्रूव होंगे।  उनके दिमाग से स्‍ट्रेस दूर होकर स्‍टैमिना आएगा। 

युवाअों के लिए योग

हर युवा अपनी बॉडी को लचीला और एक अच्छे डील डौल में देखना चाहता है।  इसलिए जैसे जैसे उम्र आगे बढ़ती है उसे योग की जरूरत बढ़ती जाती है क्‍योंकि कई बार उम्र के प्रभाव व किसी चोट आदि की वजह उनमें लचीलेपन की कमी होती है।  ऐसे में उन्हें योग सोच समझ कर अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से चुनना चाहिए।  इतना ही नहीं इसके साथ ही किसी परफेक्ट ट्रेनर के नेतृत्‍व में ही इसे रूटीन में शामिल करना चाहिए।  हालांकि सबसे पहले युवाओ के लिए हेल्थ योग ज्यादा जरूरी होता है। इससे उनकी बॉडी को काफी फायदा पहुंचता है। 


वरिष्ठ नागरिको के लिए

वरिष्ठ नागरिकों की भी एक कैटेगरी तय की गई है। जिसमें 65 की उम्र या उससे अधिक के लोग इसमें शामिल किए गए हैं।  यह जीवन का बडा सेंसटिव पड़ाव कहा जा सकता है। इस उम्र में मसल्स में कमजोरी, लचीला आदि की कमी हो जाती है।  ऐसे में इन्‍हें योग शुरू करने से पहले हेल्‍थ की जांच कराना जरूरी होता है।  जिससे मेडिकल प्रॉब्‍लम के आधार पर ही उन्‍हें योग शुरू करना चाहिए। इस उम्र में न्यूरो जैसी होने वाली समस्याओ से योग से काफी राहत मिलती है। 


योग से होने वाले और फायदे

योग लाइफ कीबहुत ही इंपार्टेंट किया है। बच्चे बूढे युवा सभी के लिए यह फायदेमंद हैं।  सबसे खास बात तो यह है कि योग शुरू में धीरे धीरे करें उसके कुछ समय बाद असर साफ दिखेगा।  उम्र के एक पड़ाव पर बॉडी में होने वाले दर्द व तकलीफों से भी आराम मिलती है।  योग से गले व सोल्‍डर की परेशानियों में काफी राहत मिलती है।  इतना ही नहीं कई बार अधिक दवाओं के सेवन से गले व सोल्‍डर पर लचीलेपन की कमी हो जाती है जिसमें ये योग काफी सहायक होते हैं।  जोड़ो के दर्द आदि में भी काफी हद तक रिलीफ मिलता है।

 

Posted By: Babita

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