संवाद सहयोगी, स्वारघाट : कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण आत्मा बिलासपुर के तत्वधान में शून्य लागत प्राकृतिक खेती पर जागरूकता कार्यक्रम का किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आत्मा के खंड तकनीकी प्रबंधक पुष्पेंद्र कुमार ने की। पशु चिकित्सक वीरेंद्र शर्मा ने शून्य लागत प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय का पालन अति आवश्यक है। देसी गाय का गोबर व मलमूत्र अपने आप मे एक औषधीय गुणों से भरपूर वस्तु है। गो मूत्र को हम ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर के रूप में इस्तेमाल कर सकते है। आज जो भी कृषि उत्पाद हम खा रहे हैं, वो इस कदर जहरीले हैं कि हमें कोई न कोई जानलेवा बीमारी हमे जकड़ लेती है। कृषि विकास अधिकारी प्रताप चंदेल ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा शून्य लागत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लोगों की प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को पुरानी विधि पर फसल उत्पादन पर करें। भू-परीक्षण अधिकारी जिला बिलासपुर प्रकाश चंद ठाकुर ने कहा कि हमें शून्य लागत से अच्छी फसल तभी मिल सकती है जब समय समय पर मिट्टी का परीक्षण करवाया जाए। अगर हम लंबे समय तक जीवित रहने है तो शून्य लागत प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता के आधार पर अपनाना होगा।

बागवानी विकास अधिकारी रमल कुमार ने बताया कि फलदार पौधों पर अगर रसायनों की बजाय गोमूत्र का छिड़काव करें तो इससे फलदार पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट तो मरेंगे ही इसके साथ ही इन पौधों में लगने वाले फलों की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

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