राजेश्वर ठाकुर, शाहतलाई

प्राइमरी सोसायटियों में प्रदेशभर में नंबर वन एवं राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल द तलाई ग्राम सेवा एवं सहकारी सभा समीति का काम संदेह के घेरे में आ गया है। करीब पांच हजार सदस्यों के निवेश के कारण इस मुकाम तक पहुंची सहकारी सभा ने हैसियत से बढ़कर कर्ज दे दिया है। अब खाते में इतने पैसे नहीं बचे हैं कि राशि लेने पहुंच रहे खाताधारकों को भुगतान हो सके। पैसे मांगने वालों में एक साधारण गरीब परिवार के आठ से दस हजार रुपये भी हैं और लाखों रुपये में भी हैं। खाताधारकों ने अब रोजाना सोसायटी आकर एफडीआर के पैसे तक निकालने के लिए आग्रह करना शुरू कर दिया है।

प्राइमरी सहकारी सभा समीति को ऋण मामले में कुछ मौलिक नियम बनाए गए हैं। नियमों के तहत सोसायटी कुल जमा पूंजी का अधिकतम 50 फीसद कर्ज दे सकती है और कर्ज देने के लिए अधिकतम क्रेडिट सीमा तय की गई है कि किस व्यक्ति को कितना कर्ज दिया जाना है। लेकिन सभा संचालक कुछ साल से तमाम नियमों को ताक पर रखकर हजारों लोगों की ओर से जमा की गई कुल जमा पूंजी का एक बड़ा हिस्सा कर्ज में दे चुके हैं। कुछ समय पहले सोसायटी की कुल जमा पूंजी करीब 95 करोड़ के आसपास थी। लेकिन इसमें से करीब 90 करोड़ रुपये तो सभा ने कर्ज दे दिया है और यह लंबे समय से रिकवर नहीं हो पा रहा है।

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सभा ने ऋण अदायगी के लिए तय नियमों से कहीं आगे जाकर कर्ज दे दिया है। अब खाताधारकों के पैसा मांगने पर वापस करने के लिए संतोषजनक राशि उपलब्ध नहीं है। एक व्यक्ति ने फोन पर बताया कि उसके साढ़े नौ हजार रुपये खाते हैं। सोसायटी इतनी कम राशि का भी भुगतान नहीं कर पा रही है। जिला अंकेक्षण अधिकारी को ऑडिट के लिए भेजा है। जल्द सोसायटी की हालत सबके सामने होगी।

-रमेश शर्मा, सहायक पंजीयक।

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सभा ने अंधाधुंध कर्जे दे दिया है। यह राशि करीब 90 करोड़ बनती है। जबकि जब कर्ज दिए गए थे तो कुल जमा पूंजी 95 करोड़ के आसपास थी। जोकि वर्तमान में 125 करोड़ है। अगर वर्तमान कुल पूंजी को आधार मान लिया जाए तो भी सभा ने तय सीमा से ज्यादा कर्ज दे दिया है जोकि अब वापस नहीं आ रहा है। उम्मीद है ऋण की रिकवरी हो जाएगी और लोगों को पैसे वापस हो सकेंगे।

-राजेश पटियाल, सचिव, द तलाई ग्राम सेवा एवं सहकारी सभा समीति।

Posted By: Jagran