नई दिल्ली। क्या आपके बच्चे के दूध के दांत टूटने वाले है.. तो उन्हे फेंकने की बजाए आप उन्हे डेटल स्टेम सेल बैंक में भविष्य में इस्तेमाल के लिए सहेज कर रख सकते है। बच्चे के आगे के जीवन में गम्भीर बीमारियों की दशा में ये दांत स्टेम कोशिकाओं के निर्माण में प्रयुक्त हो सकते है।

भारत में डेटल स्टेम सेल बैंकिंग नई है लेकिन फिर भी इसे अम्बलीकल कॉर्ड ब्लड बैंकिंग की अपेक्षा अधिक कारगर विकल्प माना जा रहा है।

स्टेम सेल थेरेपी में मरीज के शरीर के क्षतिग्रस्त ऊतकों में या घाव में स्वस्थ व नई कोशिकाएं स्थापित की जाती है।

स्टेमेड बायोटेक के संस्थापक व प्रबंध निदेशक शैलेष गडरे ने कहा, ''अम्बलीकल कॉर्ड रक्त सम्बंधी कोशिकाओं की अच्छी स्त्रोत है। खून सम्बंधी बीमारियों जैसे रक्त कैंसर में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। वैसे कहा जाता है कि सभी बीमारियों में रक्त सम्बंधी बीमारियां केवल चार प्रतिशत ही होती है।''

उन्होंने कहा, ''बची हुई 96 प्रतिशत ऊतक सम्बंधी बीमारियों के लिए ऊतक सम्बंधी स्टेम कोशिकाएं हासिल करने को दांत एक अच्छा स्त्रोत हो सकते है। ये कोशिकाएं शरीर के सभी प्रकार के ऊतकों में प्रयुक्त हो सकती है। उदाहरण के तौर पर अल्जाइमर बीमारी की स्थिति में मस्तिष्क में, पार्किसंस बीमारी होने पर आंख में, सिरोसिस होने पर लीवर में, मधुमेह होने पर अग्नाशय में व फ्रैक्चर की दशा में हड्डियों के अलावा त्वचा में भी इनका इस्तेमाल हो सकता है।''

ऊतक सम्बंधी कोशिकाओं का दिल की कोशिकाओं के पुनर्निमाण में भी इस्तेमाल हो सकता है।

बच्चों के दांत सम्बंधी रोगों की विशेषज्ञ सविता मेनन कहती है कि पांच से 12 साल उम्र के बच्चों के दूध के दांतों से स्टेम कोशिकाएं आसानी से निकाली जा सकती है। इसके लिए जब बच्चे का कोई दांत हिलने लगे तब उसे निकालकर उससे बिना किसी शल्यक्रिया के स्टेम कोशिकाएं इकट्ठी की जा सकती है।

भारत में डेटल स्टेम सेल बैंकिंग की सुविधा देने वाली कम्पनियों की संख्या अभी बहुत कम है। इनमें स्टेमेड व स्टोर योर सेल्स जैसी कम्पनियां शामिल है। स्टेम कोशिकाओं को 21 साल की अवधि तक संरक्षित रखने पर करीब 100,000 रुपये का खर्च आ सकता है।

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