वैज्ञानिकों ने एक नए दवा तकनीक की खोज की है जो डायबिटीज रोधी कंपाउंड (यौगिक) का पता लगाएगा। इससे टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में मदद मिल सकती है। इस नई तकनीक से शोधकर्ता जल्द दवा का पता सकते हैं जो वांछित तरीके से सेलुलर रिसेप्टर्स (संग्राहकों) को सक्रिय करता है। अमेरिका के द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीएसआरआइ) के शोधकर्ताओं ने टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े रिसेप्टर को लक्ष्य कर इस तकनीक का इस्तेमाल

किया। इसे जीएलपी-1 रिसेप्टर नाम दिया गया। यह पैंक्रियाज में इंसुलिन पैदा करने वाले 'बेटा सेल (कोशिका)' द्वारा संचालित होता

है। विभिन्न दवाइयां जो इस रिसेप्टर को सक्रिय करती हैं, उन्हें जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स कहा जाता है। इन्हें टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी जा चुकी है।

Posted By: Babita kashyap

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