मलेरिया (परजीवी पैरासाइट) से होने वाला एक गंभीर रोग है। ये परजीवी एनाफिलीज नामक मच्छर के काटने से फैलते हैं। मलेरिया के दो प्रकार- प्लाज्मोडियम वाइवैक्स और पी. फाल्सीपेरम- हैं। पी. फाल्सीपेरियम से हुआ संक्रमण मलेरिया का सबसे घातक प्रकार है।

गंभीर लक्षण

ऐसे लक्षणों में कई दिनों से आने वाले तेज बुखार के अलावा नीचे बताए कारणों में से कम से कम एक कारण को शामिल किया जाता है..

-मस्तिष्क का सजग न रहना, अत्यधिक कमजोरी महसूस होना।

-बेहोशी या कोमा में चले जाना।

-सांस लेने में तकलीफ।

-गंभीर रूप से एनीमिया(खून की कमी) से ग्रस्त होना।

-दौरे पड़ना। बहुत ज्यादा उल्टियां होना।

-पेशाब गहरे काले व लाल रंग का होना या फिर कम होना।

क्या करें

मलेरिया के लक्षणों के प्रकट होने पर अपने डॉक्टर या अन्य स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी से सलाह लें। यदि संदेह हो तो रक्त परीक्षण कराएं। मलेरिया एंटीजेन (मुख्यत: प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम) का पता करने के लिए डिपस्टिक परीक्षण का दुनिया भर में इस्तेमाल किया जाता है और इन्हें इस्तेमाल करना भी आसान है। यदि आप किसी ऐसे क्षेत्र में जाने वाले हैं, जहां मलेरिया का प्रकोप ज्यादा हो, तो यात्रा से कम से कम दो हफ्ते पहले इस बारे में डॉक्टर से सलाह ले लें।

बचाव

मच्छरों की रोकथाम के लिए मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाले क्वॉइल और अन्य विधियों का इस्तेमाल करें। जिन इलाकों में मच्छर बहुत ज्यादा होते हैं, वहां जाने पर मच्छरों से सुरक्षा देने वाले कपड़े पहनें। जैसे पूरी बाजू की कमीज, कुर्ता, लंबी पैन्ट और मौजे आदि। इसके अलावा इन बातों पर भी अमल करें..

-पानी की टंकियों और कूलर आदि को नियमित रूप से साफ करें।

-घर के आसपास पानी का जमाव न होने दें।

-ठहरे पानी में मच्छर बहुत तेजी से प्रजनन करते हैं। इसलिए घर के आसपास पानी का जमाव न होने दें।

अन्य जानकारियां

मलेरिया का संबंध पेयजल, स्थानीय जल स्नान न करने या विभिन्न पदार्र्थो के खाने-पीने से नहीं है। यदि कोई व्यक्ति मलेरिया से ग्रस्त हो, तो उसे रक्तदान न करना चाहिए, किंतु जरूरत पड़ने पर पीड़ित व्यक्ति को दान किया हुआ रक्त चढ़ाना पड़ सकता है।

-मलेरिया के लक्षणों के सामने आने पर खुद ही दवाएं न लें बल्कि डॉक्टर से या करीबी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर सलाह लें।

-यदि लक्षण ज्यादा खराब होने लगें, तो निसंकोच अपने डॉक्टर के पास जाएं।

-बुखार घटाने के पारंपरिक तरीकों जैसे पैरासीटामॉल से युक्त दवाएं लेने पर ही भरोसा न करें। याद रखें, ऐसी दवाओं से बुखार भले ही कम हो जाए किंतु मलेरिया के परजीवी फिर भी शरीर में बने रहते हैं और वे दोबारा उभर सकते हैं।

-यदि डॉक्टर अस्पताल में भर्ती होने को कहें, तो झिझकें नहीं।

उपचार

डॉक्टर की देखरेख में समुचित इलाज कराने से लगभग एक हफ्ते में आम तौर पर मलेरिया दूर हो जाता है। मलेरिया पर काबू पाने की कई नवीनतम दवाएं उपलब्ध हो चुकी हैं, जिन्हें डॉक्टर के परामर्श से लेना चाहिए।

(डॉ.अनिल वरदानी, बीएलके हॉस्पिटल, नई दिल्ली)

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