कुछ दिनों से मेरे दोस्त बता रहे हैं कि मैं अजीब-सी हरकतें कर रहा हूं। अचानक उत्तेजित हो जाता हूं। इस कारण सब मुझ से दूर होते जा रहे हैं। मैं क्या करूं?

किशोर राय, पटना

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आप स्कीजोफ्रेनिया नामक मनोरोग से ग्रस्त हैं। ऐसी स्थिति में जब हमारा दिमाग किसी न किसी प्रकार के विकार से ग्रस्त हो जाता है तो उस परिस्थिति में कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। स्कीजोफ्रेनिया एक प्रकार की दिमागी बीमारी है, जो सौ लोगों में से एक को प्रभावित करती है। यह एक प्रकार से 'बॉयोकेमिकल डिसऑर्डर' है, जो दिमाग के 'मैसेंजर सिस्टम' पर असर डालता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति एक प्रकार की अनजानी व डरावनी दुनिया में फंस जाते हैं। एक तिहाई रोगी पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं और शेष एक तिहाई दवाओं से इस बीमारी के चंगुल से बाहर निकल आते हैं, लेकिन शेष रोगियों को पूरी तरह से ठीक होने के लिए अस्पताल में भर्ती होकर 'इलेक्ट्रो-कंपल्सिव थेरेपी' की मदद लेनी पड़ती है। बीमारी के दूर होने के बाद ऐसे रोगियों के लिए रीहैबिलिटेशन प्रोग्राम भी मददगार साबित हो रहे हैं। इस बीमारी से लड़ने के लिए समय रहते इसकी जांच,डॉक्टर की सलाह और नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना चाहिए।

पापा पहले कभी-कभार शराब पीते थे, लेकिन अब तो रोज पीते हैं और फिर मारपीट भी करते हैं। जितना कमाते हैं, सब शराब में उड़ा देते हैं। हमने कई जगह इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। क्या करें?

सुमन कौर, जालंधर

आप चिंता मत करें। नलट्रेक्सोन इंप्लांट आप के पति और उन जैसी इसी तरह की समस्या से पीड़ित लोगों के इलाज में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।

नलट्रेक्सोन नशा प्रतिरोधी है। इस इंप्लांट के शरीर में रहते हुए अगर कोई व्यक्ति किसी तरह के नशे का इस्तेमाल करता है, तो उस पर नशे का कोई असर नहीं पड़ता। नलट्रेक्सोन एक विशेष सम्मिश्रण होता है, जिसे 6 से 10 सप्ताह की अवधि में धीरे-धीरे रिलीज किया जाता है। इसे रोगी की त्वचा के अंदर डाला जाता है। इस तरह यह असरकारी हो जाता है।

पत्नी दिन में अनेक बार हाथ धोती हैं। वह कई बार कपड़े बदलती हैं। सफाई का जरूरत से ज्यादा ध्यान रखती हैं। कई बार सफाई भी करती हैं और अगर उनके मन मुताबिक सफाई न हो तो चिल्लाने लगती हैं? क्या इस समस्या का कोई उपाय है?

मुकेश पांडेय, वाराणसी

आपकी पत्नी को ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसआर्डर (ओसीडी) नामक मनोरोग है। यह रोग एक प्रकार के वहम या सनकपन से संबंधित है। इसका इलाज दो तरीकों से किया जाता है।

1. ड्रग थेरेपी, जिसमें साइड इफ्ेक्ट होने की आशंका रहती है।

2. बिहेवियर थेरेपी, जिसके अंतर्गत रोगी को अपनी व्यग्रता और सनकपन को संतुलित रखने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस थेरेपी के अंतर्गत रोगी को सबसे पहले उन परिस्थितियों से अवगत कराया जाता है, जिसके कारण वे इस समस्या की चपेट में आते हैं। फिर उन्हें इन क्रियाकलापों को छिपाने की बजाय उन क्रियाकलापों को सबके सामने अभिव्यक्त करने और दूसरों को बताने की सलाह दी जाती है। इसके बाद उन्हें इस बीमारी के चंगुल से निकलने के उपायों की जानकारी दी जाती है।

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