नितिन शर्मा, यमुनानगर

सेक्टर 17 की आकांक्षा मिगलानी लड़कियों को इस तरह तैयार करती हैं कि वे किसी भी मंच से सवाल करने में, खुद को प्रेजेंटेशन करने में झिझके नहीं। वे उनको व्यक्तित्व विकास की ट्रेनिग देती हैं। अधिकतर लड़कियां ऐसी हैं जो अपनी बात कह नहीं पाती। इनके अंदर कहीं न कहीं आत्मविश्वास की कमी रहती है। इस कमी को पूरा करने का काम आकांक्षा कर रहीं हैं। साथ महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करती हैं। वे उनको सामाजिक कुरीतियों में न बंधने के लिए भी प्रेरित करती हैं। इसके लिए वे महिलाओं और लड़कियों के साथ परिवार के समक्ष बातचीत करती हैं।

आज बेबाक बात करतीं महिलाएं

आकांक्षा का मानना है कि चाहे हम कितनी भी डिग्री हासिल कर लें, लेकिन जब तक आत्मविश्वास की कमी होगी। तब तक हम किसी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते। इसके लिए जरूरी है कि प्रारंभिक शिक्षा से ही स्कूलों में ऐसा प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उससे बच्चे बडे़ होकर अपनी बात बेबाक रख सकें। उन्होंने इस पर काफी रिसर्च किया। स्लम एरिया में जाकर किताबें बांटना, पढ़ाना, कपड़े देकर आना हर कोई करता है। उनकी सोच इन सबसे अलग थी। ये भी जरूरतमंद महिलाओं के बीच गई। ये महिलाएं वे थीं, जो घर के अंदर ही रहती थी। आर्थिक स्थिति सु²ढ़ करने के लिए कोई न कोई काम करती हैं। फिर भी आत्मविश्वास कही दिखाई नहीं दे रहा था। न तो इनकी बातों से और न ही चलने से। उन्होंने ऐसी लड़कियों और महिलाओं की तलाश की। उनको पर्सनेलिटी डेवलपमेंट के बारे में कोचिग देनी शुरू की। इसका असर ये हुआ कि आज महिलाओं और लड़कियां बिना झिझक के अपनी बात रखती हैं। ग्रुप डिस्कशन करती हैं। अपनी डिक्शन में उन मुद्दों को रखती हैं कि जिन पर चर्चा करने से गली मोहल्ले के लोगों में थोड़ा बदलाव संभव हो।

हर कोई नहीं रखता इस तरह की सोच

मिगलानी बताती हैं कि उनकी सोच थी कि सबसे अलग चलें। जनहित में जो कार्य कोई सोच नहीं सकता। वे उसको लेकर महिलाओं के बीच जाएगी। अगर हमारी पर्सनेलिटी अच्छी नहीं है, तो कोई ध्यान तक नहीं देता। चाहे बड़े उद्योग हो या छोटे सभी में हमारा व्यक्तित्व जज देखा जाता है। उसके आधार पर हमारा चयन होता है। महिलाओं के हक में कार्य किए। इसके चलते कई बार प्रदेश स्तर पर सम्मानित हुई। लड़कियों की क्लास आज भी लेती हैं। उनको बताती हैं कि किस तरह हम आत्मविश्वास से परिपूर्ण हो सकती हैं। अंग्रेजी की बेसिक जानकारी भी देती हैं। हर रविवार इनके साथ होती हैं। समाजसेवा में परिवार का सहयोग मिला। उनके पिता प्रवीण मिगलानी और माता संयोगिता मिगलानी ने हर कदम पर साथ दिया। खुद मुलाना यूनिवसिर्टी में कार्यरत हैं। विभिन्न एक्टिविटी में सक्रिय रहने पर 50 से ज्यादा प्रमाण पत्र इनके पास हैं। परिवार के सदस्यों का जन्मदिन जरूरतमंद बच्चों के साथ मनाना अच्छा लगता है। स्वच्छता अभियान से जुड़ी हैं। स्वच्छता के लिए भी जागरूक करती हैं।

Posted By: Jagran

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