जागरण संवाददाता, यमुनानगर :

नौकरी लगवाने के नाम पर विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी रेनू मलिक से दो लाख रुपये ठग लिए गए। पुलिस को शिकायत दी गई, तो उस शिकायत पर पुलिस ने झूठी रिपोर्ट बना दी। मामले का पता आरटीआइ के जरिए लगा। इसके बाद पीड़िता ने फिर एसपी को शिकायत दी। अब पुलिस ने आरोपित अमित ऐरी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।

विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी रेनू मलिक ने बताया कि उसकी जनवरी 2019 में ट्रेन में सफर के दौरान प्रोफेसर कालोनी निवासी अमित ऐरी से मुलाकात हुई थी। बातचीत के दौरान आरोपित ने बताया कि वह जरूरतमंदों की नौकरी लगवाने का कार्य करता है। इस दौरान उसने मोबाइल नंबर लिया। इसके बाद दो-तीन बार आरोपित के घर भी गई। वहां पर उसकी पत्नी शिवानी ऐरी मिली। दंपती ने उन्हें विश्वास में लेते हुए कहा कि कईयों को नौकरी दिलवाई है। घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी बातों पर विश्वास कर आरोपित को दो लाख रुपये दे दिए, लेकिन उन्होंने कोई नौकरी नहीं लगवाई और न ही पैसे वापस किए। जब उस पर दबाव दिया, तो आरोपित ने दो लाख रुपये का चेक दिया। जो बैंक में तीन बार डिसऑर्नर हो गया। आरोपित विदेश आता जाता रहता है। ऐसे में वह विदेश भाग सकता है। इसलिए उसका पासपोर्ट जब्त किया जाए। पुलिस पर झूठी रिपोर्ट बनाने का आरोप

आरोपित के खिलाफ कार्रवाई के लिए रेनू मलिक ने नौ मार्च 2020 को एसपी को शिकायत दी गई थी। वहां से शिकायत 11 मार्च को थाना शहर में कार्रवाई के लिए भेजी गई। इस कार्रवाई से संबंधित आरटीआइ में जानकारी मांगी, तो पता चला कि पुलिस ने रेनू मलिक की गैर मौजूदगी में आरोपित अमित ऐरी के बयान कराए। आमने सामने कोई बातचीत नहीं कराई। पुलिस को दिए बयानों में अमित ने कहा कि वह रेनू मलिक को नहीं जानता और न ही उससे नौकरी लगवाने की बात हुई। बयानों में यह भी कहा कि उसने विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी नवीन शर्मा को सारे पैसे दे दिए हैं। जबकि नवीन शर्मा को पुलिस ने कभी थाने में भी नहीं बुलाया। वहीं शहर यमुनानगर थाना प्रभारी सुखबीर सिंह का कहना है कि पुलिस ने दस्तावेजों के आधार पर जांच की। कोई गलत रिपोर्ट नहीं बनाई।

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