जागरण संवाददाता, यमुनानगर : जिले में लॉकडाउन लगने के बाद सभी उद्योग बंद हैं। यदि वास्तव में ही सभी उद्योगों पर ताला लटका हुआ है तो फिर इनमें रोजाना लाखों यूनिट बिजली की खपत कैसे हो रही है। बिजली निगम का रिकार्ड तो यही कह रहा है। रोजाना इंडस्ट्री में औसतन सवा छह लाख यूनिट बिजली खपत हो रही है। जिससे साफ है कि उद्योगों को केवल दिखावे के लिए बंद दिखाया गया है। दिनरात इनमें काम चल रहा है। अधिकारियों को दिखाने के लिए केवल गेट पर ताला लगा रखा है। पहले पहले की तरह मजदूर काम करते हुए दिख जाएंगे। सरकार ने दिए थे उद्योगों को बंद करने के आदेश

प्रदेश सरकार ने दो मई को जब लॉकडाउन की घोषणा की थी तो सभी उद्योगों को भी बंद करने के आदेश दिए थे। यदि कोई उद्योगों को चलाना चाहता है तो उसे सरल हरियाणा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना था। इसके बाद ही उन्हें अनुमति मिलती है। नगर निगम प्रशासन ने तो साफ कह दिया था कि जो इंडस्ट्री उनके क्षेत्र में है वह पूरी तरह से बंद रहेगी। इंडस्ट्रियल एरिया का बड़ा हिस्सा नगर निगम में ही आता है। यहां तक दो दिन पहले चैंबर आफ कामर्स का प्रतिनिधि मंडल भी डीसी को ज्ञापन देकर इंडस्ट्री को चलाने की मांग कर चुका है।

1300 से अधिक हैं फैक्ट्रियां

जिला में मेटल व प्लाइवुड की 1300 से ज्यादा इकाइयां हैं। जिनमें करीब 70 हजार से मजदूर काम करते हैं। फैक्ट्रियों में बिजली से चलने वाले बड़े-बड़े बायलर व भट्ठियां लगी हुई हैं। जिनमें रोजाना बड़ी संख्या बिजली की खपत होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सभी उद्योग बंद है तो रोजाना लाखों यूनिट बिजली की खपत कैसे हो सकती है। सूत्रों की माने तो फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को भी शिफ्टों में बुलाया जा रहा है। जो श्रमिक दूसरे राज्यों से आए थे उनमें से काफी तो वापस जा चुके हैं। परंतु जो श्रमिक स्थानीय हैं उनमें से आधे दिन में व बाकी रात को काम कर रहे हैं।

कोई संक्रमित हुआ तो जिम्मेदार कौन

सरकार ने संपूर्ण लॉकडाउन इसलिए लगाया था ताकि कोरोना वायरस की चेन को तोड़ा जा सके। परंतु यहां तो नियमों को ताक पर रख उद्योगों को चलाया जा रहा है। यदि इस लापरवाही के चलते फैक्ट्रियों में काम करने वाला कोई श्रमिक कोरोना संक्रमित हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। गत वर्ष लॉकडाउन खत्म होने के बाद सात मई में जहां 4.52 लाख यूनिट बिजली की खपत हुई थी वह इस बार 1.72 लाख यूनिट ज्यादा है।