जागरण संवाददाता, यमुनानगर : दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर जिला जेल में बंदियों के लिए चल रहे आध्यात्मिक शिविर का शुक्रवार को समापन हो गया। इस दौरान स्वामी प्रेम प्रकाशानंद ने बताया कि विकासवाद की अंधी दौड़ में मानसिक शांति के अभाव की पूर्णता ब्रह्मज्ञान से ही संभव है। जो मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। अज्ञानता ही सभी समस्याओं की जड़ होने के कारण मनुष्य कुकृत्यों को अंजाम देता है। जिस कारण समाज में अंगुलिमाल, कंस, रावण और सिकंदर जैसे पात्रों की अभिवृद्धि होने से समाज पतन की खाई में जा गिरता है। ब्रह्मज्ञान के प्रकाश में ध्यान की गहन अवस्था में उतरकर आत्मा के प्रकाश में मनुष्य स्वयं तो सद् संस्कारों से पोषित होता ही है, साथ ही वह समाज में भी एक सद्नागरिक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाह करता है।

Posted By: Jagran

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