संवाद सहयोगी, जठलाना : नारनौल जिले में लोगों को पानी के लिए लड़ते देखा तो रजनी गोयल ने जल संरक्षण का बीड़ा उठा लिया। लोगों को जागरूक करते- करते नौकरी भी लग गई। अब जिले में जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन की जिला सलाहकार हैं। यह जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की एक विग है। जिसके तहत लोगों को जल बचाव को लेकर जागरूक किया जाता है। वर्ष 2012 से यहां कार्य कर रही रजनी गोयल अब तक 102 पंचायतों को जल सरंक्षण पुरस्कार दिलवाया। यह राज्य में पहले स्थान पर है। जिसके लिए जिला व राज्य स्तर पर पांच पुरस्कार मिल चुके हैं। इनसेट

इस तरह करती है कार्य

रजनी गोयल लोगों को जागरूक करने के लिए डोर टू डोर कार्यक्रम चलाने के साथ साथ सेमिनार भी आयोजित करती है। इसके लिए गांव गांव समितियां भी बनाई गई है। इन समितियों में शामिल लोगों को जल सरंक्षण को लेकर जागरूक किया जाता है। महिलाओं पर उनका फोकस अधिक रहता है। क्योंकि घरेलू कार्य करते समय महिलाएं जल संरक्षण में अधिक ध्यान दे सकती है। इसलिए उन्हें जागरूक करने के लिए अतिरिक्त समय भी देती है। वर्ष में करीब 30 सेमिनार आयोजित होते हैं। जिनमें जाकर वह लोगो को जागरूक करती है। स्कूलों में भी चलाएं जाते है जागरूकता अभियान

रजनी गोयल ने बताया कि बच्चे देश का भविष्य हैं। इसी भविष्य को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसा न हो इसके लिए वह स्कूलों में जाकर बच्चों को अभी से जागरूक कर रही है। बच्चों को बताया जाता है कि जल संकट कितना गंभीर रूप ले सकता है। गंभीरता ऐसी है कि तीसरा विश्व युद्ध जल को लेकर हो सकता है। इसलिए हमें जागरूक होना होगा। बरसात के जल को संजोने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम लगाने पर जोर दिया जा रहा है। व्यवहार परिवर्तन जरूरी

रजनी गोयल का मानना है कि जल सरंक्षण अभियान तभी सार्थक हो सकता है जब हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन करें। हमें जल बचाने की आदत डालनी होगी। हालत सुधर रहे है, लेकिन और अधिक सुधार की जरूरत है। क्योंकि समस्या गंभीर भी है और हम सभी की सांझी भी। इसलिए सभी का सहयोग होना जरूरी है।

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