जागरण संवाददाता, यमुनानगर : मानसून सीजन में नालों की सफाई ना होना ट्विन सिटी के मुश्किलें बढ़ा सकता है। कारण नगर निगम के पास इनकी सफाई के लिए कर्मचारियों का न होना है। विभिन्न कॉलोनियों से गुजर रहे 28 बड़े और 35 छोटे नालों की सफाई के लिए नियुक्त किए गए सभी कर्मचारी हटा दिए गए हैं। इनकी संख्या करीब 110 है। दूसरा, नालों पर अवैध निर्माण सफाई में रोड़ा बनते हैं। पॉश एरिया में सबसे ज्यादा नालों पर कब्जे हैं। लोगों ने मकानों के बाहर कई-कई फुट आरसीसी के लेंटर डालकर कब्जा किया हुआ है। कर्मचारियों के साथ बजट भी घटाया

ट्विन सिटी के नालों की सफाई के लिए इस बार नगर निगम ने बजट कम कर दिया है। गत वर्ष 55 लाख रुपये निर्धारित था, जबकि इस बार केवल 36 लाख 50 हजार रुपये निर्धारित किया है। सवाल यह उठ रहा है कि पर्याप्त संसाधनों और बजट के चलते नालों की नियमित रूप से सफाई नहीं हो पा रही थी तो कम करने पर कैसे हो पाएगी? नगर निगम में 682 सफाई कर्मचारी थे। इनमें से 110 कर्मचारियों के जिम्मे नालों की सफाई थी। अब इन कर्मचारियों को हटा दिया गया है। अब नालों की सफाई के लिए अलग से कोई कर्मचारी नहीं है। जो कर्मचारी शहर की सफाई करते हैं, उन्हीं से अब यह काम लिया जाएगा। नहीं लिया सबक

बीते वर्ष ट्विन सिटी में हुई जोरदार बारिश ने निकासी के तमाम प्रबंधों की पोल खोल दी थी। शायद ही कोई ऐसी कॉलोनी होगी, जहां बरसाती पानी घरों में न घुसा हो। यहां तक कि मॉडल टाउन जैसे पॉश एरिया में कई-कई फुट पानी था। प्रोफेसर कॉलोनी, लाजपत नगर और आजाद नगर जैसे निचले क्षेत्रों में तो हालात बहुत ही नाजुक रहे। बावजूद इसके बरसाती पानी की निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं किए जा रहे है। थोड़ी सी बारिश होते ही कॉलोनियों में पानी घुस जाता है। यह भी बड़ी समस्या

नालों पर अवैध निर्माण होने के कारण नियमित रूप से सफाई नहीं हो पाती और निकासी रुक जाती है। लिहाजा थोड़ी सी बरसात से ही शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। नालों पर अवैध कब्जा होने से बरसात के समय ओवरफ्लो हो जाते हैं और सारी गंदगी सड़क पर आकर जमा हो जाती है या फिर बहकर लोगों के घरों में जाती है। अब तो पार्षदों की जुबान पर भी एक ही बात है कि जब तक नालों से अवैध कब्जे नहीं हटाए जाते तब तक निकासी की समस्या रहेगी। इसके लिए प्लानिग तो बनती है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। वर्जन

नालों की सफाई का मुद्दा बड़ा है। इनकी नियमित रूप से सफाई जरूरी है, लेकिन कर्मचारी हटाए जाने के कारण अब सफाई नहीं हो पा रही है। नाले गंदगी से लबालब हैं। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ जाएगी। इस बारे अधिकारियों से मिले हैं और समधान की मांग की है। थोड़ी सी बारिश होते ही प्रोफेसर कॉलोनी तो पूरी जलमग्न हो जाती है।

विनोद मरवाह, पार्षद। वर्जन

छोटे-बड़े नाले गंदगी से भरे हैं। कचरे का उठान भी सुचारू रूप से नहीं हो रहा है। यह बिखरकर नालियों में गिर जाता है। शहर की सफाई को लेकर अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है। नालों की नियमित रूप से सफाई के साथ-साथ इनको कब्जा मुक्त किया जाना भी जरूरी है। अधिकारियों की ढिलाई के कारण अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हैं।

प्रिस शर्मा, पार्षद वर्जन

सफाई व्यवस्था पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। जहां-जहां नालों की सफाई की जरूरत है, वहां करवा दी जाएगी। बारिश के सीजन में शहरवासियों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।

पूजा चांवरिया, कमिश्नर, नगर निगम।

Posted By: Jagran

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