संवाद सहयोगी, बिलासपुर : सरस्वती नदी देश की सबसे प्राचीन और पवित्र नदियों में से एक है। उससे करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। इसकी स्वच्छता को बनाए रखने का कर्तव्य देश के प्रत्येक नागरिक को बनता है। आदिबद्री से लेकर बिलासपुर क्षेत्र में लगने वाले एसटीपीसी की स्थिति जांचने के लिए सभी जगहों का दौरा किया गया। एसटीपी की मदद से सरस्वती में डाले जा रहे गंदे पानी के बहाव को नियंत्रित किया जाएगा। ये बात हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज ने सरस्वती नदी का दौरा करने के बाद कही। नदी के समीप नदी में गिर रहे गंदे पानी और गंदगी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को निर्देश दिए।

तीन जिलों के 72 गांवों में लगेंगे 30 एसटीपी

प्रदेश के तीन जिलों के 72 गांवों में लगभग 30 एसटीपी लगाए जाने है। जिसमें कुरुक्षेत्र, कैथल और यमुनानगर को शामिल किया गया है। तीनों जिलों में सरस्वती नदी के समीप बह रहे गंदे पानी को डाइर्वट कर पानी को ट्रीट कर खेती उपयोग के लिए दिया जाएगा। आधा दर्जन का काम पूरा होकर काम कर रहे है, जबकि बिलासपुर क्षेत्र में मोहड़ी, खेड़ा ब्राह्मण पर एसटीपी को बनाया जाने का काम किया जा रहा है। एसटीपी के माध्यम से गंदे पानी को सरस्वती की धारा में मिलने नहीं दिया जाएगा, बल्कि उसकी मदद से पानी को रिफाइन कर खेतों में उपयोग करने के लिए किसानों को दिया जाएगा। उससे किसानों की पानी की समस्या भी कुछ हद हल हो जाएगी। सरस्वती नदी के पूरे प्रोजेक्ट पर कार्य को तेज गति से लाने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश से बात की जा रही है।

हिप्र सरकार कर रही सहयोग

हिमाचल सरकार पूरा सहयोग कर रही है। बरसात के पानी को नियंत्रित और स्टोर करने के लिए सरस्वती नदी पर डैम बनाने के लिए योजना भी जल्द शुरू कराई जाएगी। आदि बद्री से घग्गर नदी से मुहाने तक 204 किलोमीटर की दूरी है, जिसका जीर्णोद्वार किया जाएगा।

ये रहे मौजूद : इस मौके पर तहसीलदार तरुण सहोता, बीडीपीओ नरेंद्र सिंह, सरपंच चंद्रमोहन कटारिया, विपिन सिगला, अक्षय आदि थे।

Posted By: Jagran

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