जागरण संवाददाता, यमुनानगर : रोड सेफ्टी के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। बैठक में अधिकारी बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। बुधवार को रोड सेफ्टी की बैठक में अधिकारियों ने जिन मामूली खामियों को एक दिन में ठीक कराने का समय डीसी पार्थ गुप्ता से लिया था। वह भी जस की तस है। मधु चौक से कन्हैया चौक तक सड़क पर दो जगह बडे़-बड़े गड्ढे हैं। इनका मुद्दा बैठक में रखा गया था। जिस पर निगम अधिकारियों ने एक दिन में ठीक कराने का समय डीसी से लिया था, लेकिन यहां पर हालात पहले जैसे ही हैं। इसी तरह से जगाधरी बस स्टैंड की स्ट्रीट लाइट पर ऊपर तक बेल चढ़ी हुई है। यह भी नहीं कटवाई गई।

बरसात की वजह से शहर से लेकर देहात तक की सड़कों पर गड्ढे बने हुए हैं। जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। इन गड्ढों को नहीं भरवाया जा रहा है। कई जगहों पर काफी बड़े गड्ढे हैं। जहां पर अचानक से कोई बाइक सवार तेजी से निकल जाए, तो उसका गिरना तय है। इसकी वजह यह है कि दूर यह गड्ढे दिखाई नहीं पड़ते हैं। बुधवार को रोड सेफ्टी की बैठक में ऐसे सभी मुद्दे रखे गए। फोटो सहित सड़क की खामियां दिखाई गई। डीसी पार्थ गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गड्ढों में गिर रहे वाहनों की फोटो भी रखी गई थी। मधु चौक से कन्हैया साहिब चौक तक कई गड्ढे

मधु चौक से कन्हैया साहिब चौक तक जाने वाली सड़क का मुद्दा बैठक में रखा गया था। इस सड़क पर दो बड़े गड्ढे बने हुए हैं। यह करीब एक माह से इसी हाल में पड़े हैं। बैठक में जब यह मुद्दा उठा, तो निगम अधिकारियों ने इसे एक दिन में ठीक कराने की बात कही। एसपी कमलदीप गोयल ने भी इन गड्ढों को लेकर चिता जताई थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि गड्ढे भरने में समय लग रहा है, तो कम से कम इन गड्ढों के चारों और संकेतक लगा दिए जाएं। जिससे दूर से ही वाहन चालकों को नजर आए। ताकि हादसे बचा जा सके। इसके बावजूद निगम अधिकारियों ने यहां पर संकेतक तक नहीं रखवाए।

कई माह से स्ट्रीट लाइट पर चढ़ी है बेल :

जगाधरी बस स्टैंड पर लगी स्ट्रीट लाइट पर कई माह से बेल चढ़ी हुई है। जिससे उसकी लाइटें घिरी हुई हैं। रात को यदि लाइट जलती है, तो उसकी रोशनी नहीं आ पाती। इस पर रोड सेफ्टी की बैठक में इस स्ट्रीट लाइट की भी फोटो रखी गई थी। डीसी पार्थ गुप्ता ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इसे साफ कराएं। अधिकारियों ने बैठक में तुरंत इसे साफ कराने का वादा किया, लेकिन एक दिन बीतने के बावजूद यह पहले की तरह ही है।

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