जागरण संवाददाता, कपालमोचन : मेले में हर वर्ग और उम्र के लोग आकर नतमस्तक हो जाते हैं। पंजाब के जिला मोगा के लोप्यो गांव की रहने वाली तीन सहेलियां भी उन्हीं में से एक हैं। कहती हैं कि परिजनों ने कई बार उन्हें मेले में न जाने की सलाह भी दी, परंतु वे अपने आप को रोक नहीं पाई। उनके साथ कोई पुरुष आए या न आए, लेकिन वे तीनों खुद ही यहां चली आती हैं।

लोप्यो निवासी 57 वर्षीय ज्योति रानी ने बताया कि वह यहां पर गांव की अपनी सहेली 51 वर्षीय निर्मल रानी और 41 वर्षीय सुखप्रीत कौर के साथ आ रही है। वह खुद 21 साल से, निर्मल रानी 15 साल से व सुखप्रीत कौर 10 साल से मेले में आने लगी है। ज्योति ने बताया कि उसने कपालमोचन में आकर जो भी मांगा वह पूरा जरूर हुआ है। पहले उसके पास अपना घर भी नहीं था। परिवार मुश्किलों के दौर से गुजर रहा था। तब गांव में ही उसे किसी ने बताया कि वह कपालमोचन में आकर माथा टेक आए। वहां जो भी मनोकामना मांगी जाती है वह पूरी जरूर होती है। वह 21 साल पहले परिवार के साथ यहां पर आई। भगवान ने उसकी सुन ली। अब उसके पास न केवल अपना घर है बल्कि अच्छा कारोबार भी शुरू हो गया। उसके बेटे आज कनाडा और आस्ट्रेलिया में रह कर अच्छा बिजनेस कर रहे हैं। उसे पुत्रवधू भी अच्छी मिल गई। इसलिए उसकी यहां गहरी आस्था है। सुखप्रीत कौर व निर्मल रानी ने बताया कि ज्योति के कहने पर ही वे कपालमोचन मेला में आने लगे। उनकी भी मनोकामना पूरी हुई, जिसको वे बता नहीं सकते। कपालमोचन के कारण आज परिवार हर तरह से सुविधा संपन्न है। उन्होंने बताया कि पहले वे पांच दिन मेले में आकर रुकते थे, परंतु अब भीड़ ज्यादा होने लगी है। दूसरा अपनी उम्र के हिसाब से मेले में केवल तीन दिन ही ठहरते हैं।

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