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झुग्गी से प्राइवेट स्कूल का सफर... यमुनानगर की नीतू बनीं 25 जरूरतमंद बच्चों की उम्मीद की किरण, शिक्षा से संवार रहीं भविष्य

Published: Thu, 15 Oct 2026 06:00 AM (IST)

नीतू गेरा यमुनानगर में झुग्गी बस्ती के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही हैं, जुलाई 2023 में शुरू हुई यह ...और पढ़ें

बच्चों को पढ़ातीं नीतू गेरा। फोटो जागरण

बच्चों को पढ़ातीं नीतू गेरा। फोटो जागरण

HighLights

  1. नीतू गेरा झुग्गी बस्ती के बच्चों को मुफ्त पढ़ाती हैं।

  2. जुलाई 2023 से 25 बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला मिला।

  3. किताबें, बैग, स्टेशनरी भी निशुल्क उपलब्ध कराती हैं।

राहुल शर्मा, यमुनानगर। किसी के पास हुनर है, किसी के पास सपने... बस जरूरत है तो एक मौके की। इसी मौके की तलाश कर रहे झुग्गी बस्ती के बच्चों के लिए प्रेमनगर की नीतू गेरा उम्मीद की नई किरण बनी हैं। नीतू ने जुलाई 2023 में रेलवे स्टेशन के पास ऐसे पांच बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। आज उनकी इवनिंग क्लास में 25 बच्चे शिक्षा की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। सभी निजी स्कूलों में दाखिला पा चुके हैं।

नीतू मुफ्त पढ़ाने के साथ किताबें, बैग व स्टेशनरी भी उपलब्ध कराती हैं, ताकि संसाधनों की कमी किसी बच्चे की प्रतिभा व तरक्की के बीच दीवार न बने। बाल भवन के प्रोजेक्ट से जुड़ी उनकी यह पहल साबित करती है कि एक शिक्षित महिला की संवेदनशील सोच कई बच्चों के भविष्य की दिशा बदल सकती है।

निजी स्कूलों से झुग्गी बस्ती तक

36 वर्षीय नीतू गेरा का जन्म बूड़िया में हुआ। यहां राजकीय स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की, फिर एमए व बीएड की डिग्री ली। शहर के तीन निजी स्कूलों में पढ़ाने के दौरान शिक्षा की अहमियत को करीब से समझा। इसी अनुभव ने उन्हें उन बच्चों के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी, जो आर्थिक अभाव में शिक्षा से दूर रह सकते हैं।

नीतू ने माना कि शिक्षा की ज्यादा जरूरत उन बच्चों को है, जिन्हें आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है। इसी सोच के साथ जुलाई 2023 में रेलवे स्टेशन के पास झुग्गी बस्ती में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में पांच बच्चे थे, जो अब 25 हो गए हैं। नीतू बाल भवन के इवनिंग क्लासिस प्रोजेक्ट के तहत यह सेवा कर रही हैं।

किताबें-बस्ते भी, पढ़ाई भी मुफ्त

नीतू ने बच्चों को मुफ्त पढ़ाने तक अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी। उन्होंने समझा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किताबें, स्कूल बैग, कापियां व पेन-पेंसिल जुटाना भी चुनौती हो सकता है, इसलिए निश्शुल्क शिक्षा देने के साथ किताबें, बैग व स्टेशनरी भी मुफ्त उपलब्ध कराती हैं।

नीतू ने कहा कि प्रयास है कि जरूरी शैक्षणिक सामग्री के अभाव में किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके। वह चाहती हैं कि बच्चों को सीखने के लिए जरूरी संसाधन मिलें और वे नियमित स्कूली शिक्षा हासिल कर सकें।