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मणि कंबोज ने हमेशा किया गोल्ड पर होल्ड

हुडा सेक्टर 18 पार्ट टू निवासी मणि कंबोज ²ढ़ निश्चय के साथ जीवन में आगे बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोलर स्के¨टग में भाग लेकर हमेशा गोल्ड मेडल पर ही कब्जा किया।

By JagranEdited By: Published: Wed, 10 Oct 2018 12:25 AM (IST)Updated: Wed, 10 Oct 2018 12:25 AM (IST)
मणि कंबोज ने हमेशा किया गोल्ड पर होल्ड
मणि कंबोज ने हमेशा किया गोल्ड पर होल्ड

नितिन शर्मा, यमुनानगर

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हुडा सेक्टर 18 पार्ट टू निवासी मणि कंबोज ²ढ़ निश्चय के साथ जीवन में आगे बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोलर स्के¨टग में भाग लेकर हमेशा गोल्ड मेडल पर ही कब्जा किया। छह बार अंतरराष्ट्रीय स्तर व तीन बार एशियन गेम्स के साथ चार दफा व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए गोल्ड मेडल हासिल किए। इसके साथ ही 10 बार राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडलिस्ट बनने का खिताब इनके नाम है।

दूसरे बच्चों को देख खेलने की इच्छा हुई जागृत

मणि बताती हैं कि वे स्वामी विवेकानंद स्कूल में पढ़ती थी। मात्र चार साल की थी। वह फील्ड में स्के¨टग कर रहे बच्चों को देख रही थी, तो मन में स्के¨टग करने की इच्छा हुई। परिवार में इकलौती है। परिजनों का पूरा सहयोग मिला। सबसे पहले स्कूल में ही डिस्ट्रिक लेवल चैंपियनशिप हुई। जिसमें गोल्ड जीता। वहीं राज्य स्तर पर 3 सिल्वर मेडल जीते। ये जीत आसान नहीं थी। उनका टारगेट हमेशा गोल्ड मेडल पर होता था। इसके लिए वह जी जान से मेहनत करती। कोच विशाल बख्शी के मार्गदर्शन में अभ्यास किया। इसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला।

उपलब्धियां

साउथ कोरिया में 18वीं एशियन रोलर स्के¨टग चैंपियनशिप में 3-2 से मैच जीत कर गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इसके साथ ही चाइना हेफाई, चाइना के हियान 2014 में, फा्रंस में 2014 में, वर्ष 2016, व‌र्ल्ड रोलर गेम्स 2017 में नानजी चाइना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर भारत का नाम विश्व में रोशन किया। इनके पिता जसबीर ¨सह अमादलपुर स्कूल में गणित के व माता रोशन कंबोज सीनियर सेकेंडरी स्कूल बूड़िया में फिजिकल एजुकेशन की प्राध्यापिका हैं। दोनों को अपनी बेटी पर गर्व है।

न्यायिक सेवाओं में जाना चाहती है

मणि कंबोज पंजाब विश्वविद्यालय में पांच वर्षीय लॉ की स्टूडेंट है। वह कानून की पढ़ाई के बाद न्यायिक सेवाओं में जाना चाहती है। न्यायधीश बनकर जनहित में फैसले लेगी। उनका प्रयास रहेगा कि कुर्सी का पूरा सम्मान हो। इसकी मर्यादा बनी रहे।


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