जागरण संवाददाता, यमुनानगर : कोरोना की वजह से लॉकडाउन में घर में कैद लोगों पर मानसिक तनाव पड़ रहा है। पहले लोग काम से छुट्टी लेने के बहाने तलाशते थे, लेकिन अब लॉकडाउन में उन्हें यह मौका मिला तो इसमें घरों में कैद हो गए। मनोचिकित्सक डॉ. दिव्य मंगला का कहना है कि इस समय में लोगों की जीवन शैली बदल गई है। इसे लोगों को स्वीकार करना चाहिए। इस समय में खुद को व्यस्त रखें। इससे मन में अपराध बोध नहीं आएगा।

डॉ. मंगला का कहना है कि लॉकडाउन में लोगों को अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। घर के जिन कामों के लिए वह समय नहीं निकाल पाते थे। अब उन्हें करें। एक शेड्यूल बनाए। जिसमें सुबह योग करना, फिर गार्डनिग करना या परिवार के साथ बैठकर वक्त बिताना जैसी एक्टिविटीज शामिल करें। अपनी डायरी मेंटेन कर सकते हैं, क्योंकि यह समय ऐसा है। जो हर किसी के लिए यादगार रहेगा। पहले ऑफिस या बिजनेस की भागदौड़ में जो लोग परिवार को समय नहीं दे पाते थे। अब उनके पास वक्त है। परिवार से बात करने का। समय गुजारने का। इस समय का आनंद लें। इससे लोग मानसिक तनाव में नहीं आएंगे। दूसरा यह है कि कुछ लोग अभी भी बिनायल स्टेज में है। जैसे कि वह समझ रहे हैं कि कोरोना कुछ नहीं है। बेवजह लॉकडाउन किया हुआ है। ऐसे में लोगों को इस स्टेज से बाहर आकर समझना होगा कि कोरोना फैल रहा है। इससे बचाव का तरीका यही है कि घर में रहें। यदि बहुत जरूरी है, तो ही मुंह पर मास्क लगाकर निकलें और एक दूसरे के संपर्क में आने से बचें।

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