जागरण संवाददाता, कपालमोचन : कार्तिक पूर्णिमा एवं गुरु नानक देव के 550वें प्रकाशोत्सव पर तीर्थराज कपालमोचन चार लाख दीयों से रोशन हुआ। श्रद्धालुओं ने रात 12 बजे स्नान करने के बाद कपालमोचन, ऋणमोचन और सूरजकुंड पवित्र सरोवरों पर दीपदान किया। कपालमोचन की सड़कों पर वाहे गुरु-वाहे गुरु के ही बोल सुनाई दे रहे थे। मेले में उमड़ी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई सड़कों पर तो जाम लग गया।

करीब आठ करोड़ का हुआ कारोबार

पहले तीन दिनों में मेला में केवल दो लाख श्रद्धालु ही पहुंचे थे। परंतु सोमवार रात तक मेले में करीब छह लाख श्रद्धालु पहुंच गए। जो सड़कें खाली दिखाई देती थी अब उन पर पांव रखने की भी जगह नहीं थी। मेला परिसर में लगी दुकानों से पंजाब व अन्य जगह से आए श्रद्धालुओं ने खूब खरीदारी की। मेले में सबसे ज्यादा कपड़ों, बर्तनों, खिलौने, लकड़ी का सामान की दुकानें दी। घर लौटने से पहले श्रद्धालुओं ने मेले में दिल खोल कर सामान खरीदा। जानकारों की माने तो मेला में पांच दिन में करीब आठ करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जबकि पहले तीन दिन में श्रद्धालु कम आने से खरीदारी बहुत कम हुई थी। दुकानदारों को लग रहा था कि इस बार तो दुकानों का किराया भी उनके ही गल पड़ जाएगा।

खूब बिके दीये और तेल

कार्तिक पूर्णिमा की रात स्नान करने से पहले शाम को श्रद्धालुओं ने सभी सरोवरों के किनारे पर दीये जलाए। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए एक दीया पांच रुपये का भी बिका, क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा को दीपदान करना शुभ माना जाता है। इसलिए बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गो से लेकर सभी ने दीये जलाए। रात को दीये जलने से सरोवरों का नजारा देखने लायक था। इसके साथ ही दीये बनाने वालों को मेले से अच्छी आमदनी हो जाती है। इससे पहले श्रद्धालुओं ने कपालमोचन के अलावा आदिबद्री और बसातियांवाला स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में जाकर भी पूजा अर्चना की।

पैदल सफर करने से श्रद्धालुओं को हुई परेशानी

श्रद्धालुओं को मेला जाने वाले नाकों पर ही पुलिस के रोकने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां तक कि नाकों से आगे मेले में जो ऑटो चल रहे थे, उन्हें भी बाहर कर दिया गया। ऐसे में श्रद्धालुओं को बिलासपुर से लेकर कपाल मोचन तक का सफर पैदल ही तय करना पड़ा। बरनाला से आए श्रद्धालु मान सिंह, जोरावर सिंह, सतनाम सिंह, बेअंत कौर ने बताया कि वे सैकड़ों मील का सफर कर कपालमोचन में दर्शन करने आए हैं। उनमें 90 साल तक के श्रद्धालु हैं। इस उम्र में वे पैदल सफर कैसे करेंगे। मेला के अंदर वाहनों को जाने नहीं दे रहे हैं।

डीसी और एसपी ने लिया सुरक्षा का जायजा

कार्तिक पूर्णिमा का स्नान करने से पहले डीसी एवं श्राइन बोर्ड के मुख्य प्रशासक, एसडीएम बिलासपुर एवं मेला प्रशासक, एसपी कुलदीप सिंह ने मेले का निरीक्षण कर प्रबंधों व सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। डीसी ने सूचना एवं प्रसारण केंद्र में जाकर सभी श्रद्धालुओं को माइक के माध्यम से गुरुपर्व की बधाई देते हुए सभी की खुशहाली की मनोकामना की। इसके अलावा अन्य अधिकारी भी मेले का निरीक्षण करते रहे।

सात सौ लोगों को मिलवाया

स्नान के बाद काफी श्रद्धालु ऐसे भी थे जो भीड़ के कारण एक दूसरे से बिछड़ गए। सूचना एवं प्रसारण केंद्र में बैठे कर्मचारी माइक से बिछड़े हुए लोगों की अनाउंसमेंट करते रहे। एक रात में ही अपनों से बिछड़े सात सौ श्रद्धालुओं को मिलाया गया।

ऋणमोचन सरोवर में स्नान से मिलती ऋण से मुक्ति

मान्यता है कि भगवान शिव को जब ब्रह्म हत्या का दोष लगा था तब वे कपालमोचन में पहुंचे थे। यहां आकर उन्होंने कपालमोचन सरोवर में स्नान किया था, जिससे शिव शंकर को ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिली थी। इसके अलावा ऋण मोचन सरोवर में मनुष्य को ऋण से मुक्ति मिलती है। वहीं गुरु गोबिद सिंह 52 दिन तक कपालमोचन में रुके थे। यहां बने पवित्र सरोवरों में उन्होंने भंगियानी युद्ध के बाद अपने शस्त्र धोए थे। इसके अलावा महाभारत का युद्घ खत्म होने के बाद पांडव कपालमोचन में आए थे।

Posted By: Jagran

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