प्रतापनगर : जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर छछरौली-पांवटा नेशनल हाइवे पर गांव कलेसर में यमुना नदी किनारे बने श्रीकालेश्वर महादेव मठ में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सावन में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। हर दिन श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां पर भगवान शिव और मां पार्वती की प्राचीन मूर्तियां विराजमान हैं। खोदाई में मिली भगवान नटराज की प्रतिमा मंदिर में स्थापित की गई है। खोदाई से मिले पत्थरों पर अंकित संस्कृति एवं सांकेतिक भाषा से प्रतीत होता है कि यहां स्वयं भगवान शिव स्वयं भू शिवलिग के रूप में विराजमान है।

मंदिर का इतिहास

मंदिर की प्राचीनता को ब्यां करता हजारों वर्ष पुराना वट वृक्ष मंदिर प्रांगण में विराजमान है। वट वृक्ष के नीचे हर रविवार को जनकल्याण के लिए हवन किया जाता है। मंदिर का जीर्णोद्धार कलेसर निवासी चौधरी मामराज सिंह ने 1933 में करवाया था। चौधरी ने मंदिर की व्यवस्था चलाने के लिए 13 एकड़ जमीन भी मंदिर के नाम दान की थी। मामराज द्वारा महात्मा शंकर गिरी को प्रथम महंत बनाया गया। उनके बाद स्वामी महानंदपुरी ने 1978 से 2001 तक मंदिर का विस्तार किया। 28 अक्टूबर 2003 को मंदिर कमेटी का पुनर्गठन कर स्वामी देवमूर्ति महाराज को ट्रस्ट का प्रधान नियुक्त कर दिया गया। देवमूर्ति के स्वर्गवास के बाद 30 सितंबर 2009 को स्वामी शांतानंद महाराज को ट्रस्ट का प्रधान नियुक्त किया गया। वर्तमान में स्वामी शांतानंद की अध्यक्षता में मंदिर कमेटी विकास के लिए प्रयासरत है।

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शिवरात्रि पर विशेष तैयारी

शिवरात्रि के दिन मंदिर में विशेष रूप से पूजा अर्चना होती है। विशाला भंडारे का आयोजन होता है। जरूरतमंद कन्याओं की शादी की जाती है। मंदिर में रात्रि ठहराव के लिए विशेष प्रबंध किया हुआ है। साथ ही साफ-सफाई पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है।

Edited By: Jagran