जागरण संवाददाता, यमुनानगर : प्रशासन और पुलिस की सुस्ती से विमल एल्यूमिनियम प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में सिलेंडर लीकेज से झुलसे तीन श्रमिकों की मौत का मामला दब गया है। न तो मृतकों और झुलसे श्रमिकों के परिजनों को कोई आर्थिक सहायता मिली और न ही मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। हालांकि शहर यमुनानगर थाने में केस दर्ज हुआ था। श्रमिकों की मौत के बाद इसमें 304 धारा भी ईजाद की गई, लेकिन मालिकों तक अभी पुलिस नहीं पहुंची। वहीं फैक्ट्री के सिलेंडरों को जांच के लिए लैब में भिजवाने की बात कही गई थी, लेकिन चुनाव की व्यस्तता के चलते अभी तक इस केस में तफ्तीश आगे नहीं बढ़ सकी। पुलिस और प्रशासन तीन लोगों की मौत के मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। हादसे के बाद मौके पर जगाधरी एसडीएम पूजा चांवरिया और एसपी कुलदीप सिंह यादव ने दौरा कर बड़ी गंभीरता दिखाई थी।

16 सितंबर को विमल एल्यूमिनियम प्राइवेट लिमिटेड में सिलेंडर की लीकेज ठीक करते समय आग लग गई, जिसमें 13 कर्मचारी झुलस गए थे। गंभीर रूप से झुलसे नौ कर्मचारियों को पीजीआइ रेफर किया गया था। इस हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौका मुआयना किया। डिटेल रिपोर्ट में सामने आया कि मालिकों की लापरवाही से हादसा हुआ है। सिलेंडर की लीकेज बंद करने की वॉल्व फ्री हो गया था। कई दिनों से यह खराब थी। पुलिस ने श्रमिक विकास की शिकायत पर मालिक रजनीश खरबंदा व अन्य पर 336, 337, 338 व एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। बाद में इलाज के दौरान जीएम एसएस पुंडीर व दो अन्य कर्मियों की मौत हो गई। पुलिस ने धारा ईजाद करते हुए मालिकों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था।

Posted By: Jagran

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