भाभी ने देवर को दी किडनी, ममता की मिसाल बनी कमलजीत सैनी
यमुनानगर की अध्यापिका कमलजीत सैनी ने अपने देवर सुरेंद्र को नया जीवन दिया, जब उन्होंने अपनी एक किडनी दान कर ...और पढ़ें
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भाभी ने देवर को दी किडनी, ममता की मिसाल बनी कमलजीत सैनी।
HighLights
कमलजीत सैनी ने देवर सुरेंद्र को किडनी दान की
2016 में सुरेंद्र की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं
यह त्याग भाभी-देवर के रिश्ते की अनूठी मिसाल है
राहुल शर्मा, यमुनानगर। रिश्ते खून से बनते हैं, पर कुछ अपने त्याग से उससे भी गहरे हो जाते हैं। सेक्टर-17 निवासी अध्यापिका कमलजीत सैनी ने देवर व भाभी के रिश्ते को ऐसी ही मिसाल दी है। वर्ष 2016 में जब उनके देवर सुरेंद्र की दोनों किडनियां खराब होने के बाद जिंदगी बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट एकमात्र रास्ता बचा, तब परिवार के सामने डोनर की तलाश सबसे बड़ी चुनौती थी। सुरेंद्र की पत्नी सजना देवी ने किडनी देने की इच्छा जताई, पर जांच में उनकी किडनी मैच नहीं हुई।
विज्ञान अध्यापक खेमलाल सैनी ने बताया कि उन्होंने छोटे भाई सुरेंद्र के लिए अपनी किडनी देने का फैसला किया। परिवार में जब इस बात की चर्चा हुई तो उनकी पत्नी कमलजीत ने कहा कि अगर किसी की जिंदगी बचाने का अवसर मिल रहा है तो यह सौभाग्य उन्हें मिलना चाहिए। कमलजीत ने खुद किडनी देने की इच्छा जताई।
परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए जांच कराई। जांच में कमलजीत की किडनी सुरेंद्र से मैच हो गई। ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की गई। एक ओर जहां परिवार सुरेंद्र की जिंदगी को लेकर चिंतित था, वहीं कमलजीत ने आपरेशन व उससे जुड़े जोखिम की परवाह किए बिना देवर को किडनी देने का फैसला कायम रखा। उनका यह निर्णय परिवार के लिए भावुक क्षण था।
किडनी नहीं, देवर को दी जिंदगी की नई उम्मीद
कमलजीत के इस त्याग से सुरेंद्र को नया जीवन मिला। परिवार के अनुसार उस मुश्किल दौर में कमलजीत की हिम्मत और निर्णय ने पूरे परिवार को संभाला। भारतीय संस्कृति में बड़ी भाभी को मां समान माना जाता है और कमलजीत ने इस रिश्ते को सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि अपनी किडनी देकर निभाया।
आज भी परिवार के लिए वह फैसला इस बात की मिसाल है कि जब रिश्तों में ममता हो तो इंसान किसी दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए अपना दर्द व जोखिम भी भूल जाता है।
