संवाद सहयोगी, रादौर : स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्र को तामसी ¨नद्रा से जगाकर प्रबुद्ध भारत को जन्म दिया था। जिसके दूरदर्शी और प्राणोतेजक विचारों ने राष्ट्र की पराधीनता को छिन्न-भिन्न करने की अनुपम शक्ति प्रदान की। भारत के ऋषियों की प्रज्ञा के चमत्कार से जिसके पराक्रम ने दिग्विजय कर समस्य विश्व में ¨हदू धर्म की वैजयंती फहराई।

यह शब्द आर्य समाज के समर्थक मान ¨सह आर्य ने कहे। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद अपने समय के भारत को एक सुप्त ¨सह रूप में देखते थे। इसे जागृत करने के लिए ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता भी पड़ी जो अपने समाज के हित में प्रत्येक कार्य को चाहे वह कितना भी क्यों न हो, बिना हिचक के करना जानता हो। ऐसे नेतृत्व केवल दृढ़ चरित्र वाला व्यक्ति ही प्रधान कर सकता हैं जो राष्ट्रहित में स्वयं के बलिदान के लिये तत्पर हो।

Posted By: Jagran

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