जागरण संवाददाता, यमुनानगर: जीएसटी को व्यापारी वर्ग बोझ मान रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि इसके लागू होने से व्यापारियों के साथ-साथ युवाओं को फायदा हुआ है। उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ गए हैं। कॉलेजों में चल रहे दाखिले में इसका असर देखने को मिल रहा है। सबसे ज्यादा मांग कॉमर्स संकाय की हुई है। देशभर में साढ़े सात लाख विद्यार्थी सीए की पढ़ाई कर रहे हैं। चार्टेर्ड अकाउटेंट जीएसटी लागू होने के बाद देश की अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ होने की बात कह रहे हैं। मॉडल कॉलोनी निवासी अजय अग्रवाल और उनकी पत्नी अंजलि अग्रवाल दोनों ही सीए हैं। दोनों ने अपनी सफलता की कहानी साझा की।

मॉडल कॉलोनी निवासी सीए अजय अग्रवाल बताते हैं कि सीए बनने के लिए कठिन परिश्रम की जरूरत है। इसके लिए केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि अभ्यास की भी जरूरत होती है। वर्ष 1973 में जन्मे अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने महाराजा अग्रसेन कॉलेज जगाध्ररी से ग्रेजुएशन की। पढ़ाई के दौरान हमेशा सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे। कई प़ुरस्कार भी जीते। पढ़ाई में हमेशा मेरिट में रहें। इसके बाद वर्ष 1993 में सीए कोर्स में दाखिला लिया। शुरुआत में बहुत मुश्किल लगा, बाद में दृढ़निश्चय से सफलता पाई। वर्ष 1997 में सीए बने। तब से लेकर आज तक इनकम टैक्स में प्रेक्टिस कर रहे हैं। जब से जीएसटी लागू हुआ है तब इसमें भी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान समय में यमुनानगर ब्रांच आइसीएआइ के चेयरमैन पद पर सुशोभित हैं। हमेशा प्रयास रहता है कि जो भी समस्या इनके सामने आए उसका प्राथमिकता से हल हो। इतना ही नहीं जो विद्यार्थी सीए की पढ़ाई कर रहे हैं, उनके समक्ष आने वाली कठिनाइयों को भी दूर किया जा सके। देश में तीन लाख के करीब सीए हैं। साढ़े सात लाख के करीब विद्यार्थी इसकी पढ़ाई कर रहे हैं। जुलाई 17 में जीएसटी लागू की गई। इससे देश की अर्थ व्यवस्था मजबूत हुई है। इसको सही तरीके से लागू करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की विशेष भूमिका रही है। कारोबारियों के समक्ष आने वाली समस्याओं को दूर भी करने का काम कर रहे हैं। जब से सीए बने हैं तब से उनका यही प्रयास रहा है कि उनका ज्ञान किसी के काम आ सके। इनकी पत्नी अंजलि अग्रवाल भी सीए हैं। पत्नी के परिवार में प्रेक्टिस कर रहे आठ लोग

अजय अग्रवाल ने बताया कि उनकी पत्नी अंजलि अग्रवाल शिमला से हैं। उनकी पढ़ाई चंडीगढ़ से पूरी हुई है। वर्ष 1996 में वे सीए बनीं। ये तीन बहन और एक भाई हैं। सभी सीए हैं। इनकी बहन और उनके पति सीए हैं। अंजलि ने बताया कि उनके माता-पिता का सपना था कि उनके बच्चे सीए बने। माता-पिता के सपने को पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत की। सीए बनने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ा। जब सीए बनी तो माता-पिता ने उन पर गर्व महसूस किया। हर क्लास में अव्वल रहीं हैं। उन्होंने लड़कियों को संदेश दिया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें। जब लक्ष्य तय होगा मंजिल के लिए किया संघर्ष निश्चित ही सफल होगा। जिद करने अपनी दुनिया बदले। लोग क्या कहेंगे इसकी परवाह नहीं करे, जो बात सही है तो उसके अड़ जाए। अनुचित बात का समर्थन बिल्कुल नहीं करें।

Posted By: Jagran