गांवों ने संभाली ऑक्सीजन की डोर, यमुनानगर में 98% पेड़ देहातों में; कंक्रीट का जंगल बनकर रह गए शहर
यमुनानगर की हरियाली मुख्य रूप से गांवों पर निर्भर है, जहां 98% से अधिक पेड़ हैं, जबकि शहरों में पेड़ों की भारी कमी है।
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यमुनानगर में 98% पेड़ देहातों में (फाइल फोटो)
पोपीन पंवार, यमुनानगर। जिले की हरियाली का बोझ गांव उठा रहे हैं। राज्य में जंगलों से बाहर करीब 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें अकेले जिले के 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ हैं। कुल पेड़ों में जिले की हिस्सेदारी करीब 14.86 प्रतिशत है।
यानी राज्य के जंगलों से बाहर दर्ज करीब हर सातवां पेड़ यमुनानगर में है। लेकिन जिले की इस हरियाली का बड़ा हिस्सा गांवों में है। 490 पंचायतों में 59 लाख 97 हजार 412 पेड़ दर्ज हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में सिर्फ 96 हजार 474 पेड़ हैं।
कुल पेड़ों में ग्रामीण हिस्सेदारी 98.41 प्रतिशत और शहरी हिस्सेदारी महज 1.58 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के पेड़ों की संख्या में करीब 62 गुना का अंतर है। आंकड़े शहरों में हरियाली बढ़ाने की बड़ी चुनौती सामने रखते हैं।
आंकड़ों में यमुनानगर प्रदेश में सबसे अधिक पेड़ों वाला जिला है। प्रदेश के कुल पेड़ों में 14.86 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे हरियाली के मामले में अलग स्थान देती है। इसके बावजूद शहरों में पेड़ों की कम संख्या चिंता और चितंन का विषय है।
जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1756 वर्ग किलोमीटर यानी 4 लाख 33 हजार 916 एकड़ है। 25 हजार एकड़ क्षेत्र कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव प्राणी विहार का है। निजी क्षेत्र को शामिल करने पर जिले के 18.55 प्रतिशत क्षेत्र में वन क्षेत्र आता है। वन क्षेत्र के मामले में प्रदेश में पंचकूला के बाद यमुनानगर दूसरे स्थान पर है।/B
पौधे लगाने से ज्यादा बड़ी चुनौती बचाना
हर साल पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद पौधों को बचाना चुनौती बना हुआ है। पौधों की बचत दर 65 से 70 प्रतिशत है। यानी 100 पौधे लगाने पर करीब 30 से 35 पौधे जीवित नहीं रह पाते। इस बार बचत दर 90 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मौजूदा अधिकतम बचत दर से 20 प्रतिशत अंक का सुधार करना होगा।
कलेसर में आयोजित 74वें वन महोत्सव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को पौधों की बचत दर 90 प्रतिशत करने के निर्देश दिए थे। लोगों से पौधे लगाने के बाद पांच साल तक उनकी देखरेख करने की अपील भी की थी।
15 नर्सरियों में तैयार हुए 16.40 लाख पौधे
जिले में वन विभाग की 15 नर्सरियां हैं। वर्ष 2025-26 में करीब 16 लाख 40 हजार 767 पौधों की आपूर्ति की जा रही है। इनमें क्लोन यूके प्लांट के 10 लाख 23 हजार 115, सरकारी भूमि के लिए 2 लाख 62 हजार 652, किसानों को निशुल्क देने के लिए 75 हजार, जल शक्ति अभियान के लिए दो लाख और पौधागिरी के 80 हजार पौधे शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में कुल 22 लाख 50 हजार 808 पौधों की आपूर्ति हुई थी। पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 27.10 प्रतिशत कम है।
जिले में पापुलर और सफेदा की संख्या सबसे ज्यादा है। पापुलर के 42 लाख 56 हजार 654 पेड़ हैं। यह कुल पेड़ों का 69.86 प्रतिशत है। सफेदा के 11 लाख 39 हजार 557 पेड़ हैं। इनकी हिस्सेदारी 18.70 प्रतिशत है। दोनों प्रजातियों को मिलाकर 53 लाख 96 हजार 211 पेड़ हैं।
यानी जिले के कुल पेड़ों में करीब 88.54 प्रतिशत हिस्सेदारी पापुलर और सफेदा की है। प्लाईवुड उद्योग के कारण किसान इन दोनों प्रजातियों की खेती बड़े स्तर पर करते हैं। यमुना नदी के आसपास की परिस्थितियां भी इनके लिए अनुकूल हैं। ये पेड़ करीब तीन से चार साल में तैयार हो जाते हैं।
75 वर्ष पुराने 507 पेड़ों को पेंशन
नए पौधे लगाने के साथ पुराने पेड़ों के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। प्राण वायु देवता योजना के तहत जिले में 75 वर्ष पुराने 507 पेड़ों का चयन किया गया है। इनके संरक्षण के लिए प्रति पेड़ तीन हजार रुपये सालाना पेंशन दी जा रही है। इस हिसाब पेड़ों के संरक्षण पर सालाना 15 लाख 21 हजार रुपये की पेंशन दी जा रही है। योजना में पेड़ों के चयन के मामले में यमुनानगर प्रदेश में रेवाड़ी के बाद दूसरे स्थान पर है।
शहरों की हरियाली बढ़ाने पर विशेष जोर
प्रदेश सरकार ने इस बार पौधारोपण के साथ शहरी वानिकी पर भी जोर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कलेसर में आयोजित वन महोत्सव में शहरों में हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष योजनाओं का उल्लेख किया था।
वन रक्षा दल के महासचिव चौधरी बलबीर सिंह व सदस्य रविंद्र गुर्जर का कहना है कि पौधा लगाना शुरुआत है, लेकिन असली काम उसे बचाना है। नियमित देखरेख और सुरक्षा की व्यवस्था हो तो बचत दर बढ़ाई जा सकती है।
आंकड़ों में यमुनानगर की हरियाली
| आंकड़ा श्रेणी | विवरण / संख्या |
| कुल पेड़ | 60,94,153 |
| हरियाणा में जंगलों से बाहर कुल पेड़ | करीब 4.01 करोड़ |
| प्रदेश के कुल पेड़ों में यमुनानगर की हिस्सेदारी | करीब 14.86% |
| ग्रामीण क्षेत्र के पेड़ | 59,97,412 (98.41%) |
| शहरी क्षेत्र के पेड़ | 96,474 (1.58%) |
| ग्रामीण-शहरी पेड़ों का अनुपात | करीब 62 गुना |
| कुल भौगोलिक क्षेत्रफल | 4,33,916 एकड़ |
| कलेसर राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव प्राणी विहार | 25,000 एकड़ |
| वन क्षेत्र | 18.55% |
| वन विभाग की नर्सरियां | 15 |
| पौधा आपूर्ति में एक साल में कमी | 6,10,041 पौधे (27.10% की कमी) |
| वर्तमान पौधा बचत दर | 65% से 70% |
| इस बार पौधा बचत का लक्ष्य | 90% |
| प्रदेश में पौधारोपण का कुल लक्ष्य | 2.10 करोड़ से अधिक |
| प्राण वायु देवता योजना (वृद्ध पेड़) | 507 पेड़ (₹3,000/वर्ष प्रति पेड़, कुल ₹15.21 लाख सालाना) |
| पेड़ की प्रजाति | संख्या | हिस्सेदारी (%) |
| पापुलर | 42,56,654 | 69.86% |
| सफेदा | 11,39,557 | 18.70% |
| मिक्स | 4,59,228 | 7.53% |
| आम | 81,507 | 1.34% |
| शीशम | 71,476 | 1.17% |
| जामुन | 31,707 | 0.52% |
| पापड़ी | 14,664 | 0.24% |
| नीम | 12,609 | 0.21% |
| अमरूद | 11,112 | 0.18% |
| आंवला | 5,901 | 0.10% |
| किकर | 4,619 | 0.08% |
| पीपल | 2,957 | 0.05% |
| पिलखन | 1,890 | 0.03% |
| बरगद | 272 | 0.004% |
| श्रेणी | 2024-25 | 2025-26 |
| क्लोन यूके प्लांट | 13,37,050 | 10,23,115 |
| सरकारी भूमि के लिए | 3,58,758 | 2,62,652 |
| किसानों को निशुल्क | 75,000 | 75,000 |
| जल शक्ति अभियान | 4,00,000 | 2,00,000 |
| पौधागिरी | 80,000 | 80,000 |
| कुल आपूर्ति | 22,50,808 | 16,40,767 |
