जासं, यमुनानगर : कृषि विज्ञान केंद्र दामला की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन किसान गोष्ठी का आयोजन हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. नरेंद्र गोयल ने घटती भूमि की उपजाऊ शक्ति पर प्रकाश डाला। धान के अवशेषों को जलाने की बजाय मिट्टी में मिलाएं। हमारी जमीन में घटती जैविक अंश के स्तर को भी खेत में पराली गला कर रोका जा सकता है। इससे जमीन की भौतिक रासायनिक और जैविक गुणों में भी बढ़ोतरी होगी तथा जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी इसके साथ उन्होंने अनुरोध किया कि खादों का प्रयोग मिट्टी की जांच के आधार पर करें व फसलों में गोबर की खाद कंपोस्ट खाद, केंचुआ खाद, जीवाणु खाद के साथ ही खेतों जिक में जिप्सम का प्रयोग अवश्य करें। इसके अलावा जीरो टील मल्चर हैप्पी सीडर आदि से भी फसल अवशेष प्रबंधन किया जा सकता है। इस अवसर पर सरस्वती नगर के 50 किसानों ने भाग लिया व कृषि से संबंधित जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों और शंकाओं का भी निवारण किया।

पराली न जलाने की शपथ दिलाई

संस, सरस्वतीनगर : ब्लॉक के सभी गांव में सरपंच,ग्राम सचिव व अन्य कर्मी गांव- गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। उन्हें पराली जलाने के दुष्प्रभाव से अवगत करा रहे हैं। गांव सारण में सरपंच कोमल दीपक राणा की अध्यक्षता में हुई मीटिग में पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे अवगत कराया। ग्राम सचिव सुंदर सिंह ने ब्लाक के दर्जन भर गांव भगवानपुर, बीडबलसुआ, भोगपुर आदि में किसानों की सभाएं कर उन्हें पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत कराया। किसानों को पराली न जलाने की शपथ दिलवाई गई। इस मौके पर गांव के सरपंच व पंचायत सदस्य उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप