संवाद सहयोगी, देवधर : कलेसर रेंज के अंतर्गत आने वाले बरौली माजरा के जंगल में छिपा कर रखी गई लाखों की खैर की लकड़ी बरामद की। आरोप है कि जंगल की रखवाली करने वाले ही एक कर्मचारी द्वारा खैर की लकड़ी को जंगल में छिपाकर रखा गया था। यह मामला वन विभाग के साथ-साथ वन मंत्री कंवरपाल के पास भी पहुंचा। जिन लोगों ने लकड़ी को पकड़ा उन्होंने थाने में शिकायत दी।

शिकायतकर्ता बिदर, गुरपाल सिंह व रामजतन ने बताया की बरौली माजरा के जंगल में 20 वर्षों से बरौली गांव के ही एक व्यक्ति को जंगल की रखवाली के लिए रखा हुआ है। यह व्यक्ति खुद लकड़ी काटकर इसके टूकड़े एकत्रित कर रहा था। करीब 10 क्विटल खैर की लकड़ी वहां छिपा रखी थी। विभाग की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। शिकायतकर्ता ने बताया कि मौका पर बुलाए गए गार्ड रामकुमार से जब इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि बरौली माजरा के जंगल में खैर के पेड़ ही नहीं है। जब शिकायतकर्ता ने 100 से अधिक पेड़ों को मौका पर ही गिनवाया तो गार्ड के पास कोई जवाब नहीं था। इससे पहले भी कलेसर रेंज के अंतर्गत आने वाले खिलांवाला, बागपत, आमवाली, टिब्बियों, कलेसर व ताजेवाला जगहों पर पहले ही खैर कटने की घटनाएं हो चुकी हैं। खैर की जो लकड़ी बरामद की गई है उसे मार्केट में बेचा जाना था, लेकिन साथ लगते किसानों ने इसे पकड़ लिया।

इस बारे में वन विभाग के कलेसर रेंज अधिकारी कुलदीप का कहना है कि उन्होंने मौका कर लिया है। कुछ पेड़ बरसात में गिरे हुए थे। पहले इससे पहले करीब दो क्विटल खैर की लकड़ी पड़ी है। फिर भी मामले की जांच करेंगे।

जिला वन अधिकारी सुरजभान का कहना है कि खैर के मामले में जांच की जाएगी, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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