जागरण संवाददाता, यमुनानगर : नगर निगम के वार्ड नंबर-7 के विकास पर सरकार खास मेहरबान रही। अलग-अलग कार्यों पर 7 करोड़ रुपये खर्च हुए। बावजूद इसके कुछ समस्याएं हैं जिनका जनता समाधान चाहती है। रामनगर सहित आसपास की कॉलोनियों में बारिश के दौरान बाढ़ के जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। हालांकि इस समस्या के समाधान के लिए जगाधरी शहर की निकासी परवालों स्थित एसटीपी में डाइवर्ट कर दी है, लेकिन अभी इसके सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। उम्मीद है भविष्य में इसका समाधान हो जाएगा। सफाई का मुद्दा भी बड़ा है। सेक्टर-17 के सामने कचरे के ढेरों का मामला कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उठ चुका है, लेकिन इसका समाधान नहीं हुआ। इनसेट

ये है विशेषता

वार्ड की आबादी करीब 22 हजार है। पार्षद प्रीति जौहर भाजपा समर्थित हैं। महिला मोर्चा की महामंत्री भी हैं। इसके अलावा मिसेज इंडिया फेस आफ नार्थ क्वीन आफ सब्सटेंस-2017 व मिसेज भारत आइकॉन का खिताब भी मिल चुका है। वार्ड में हुड का सेक्टर-17 भी शामिल है। कई छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां व बड़े शिक्षण संस्थान भी हैं। इनसेट

ये कार्य जो हुए

निवर्तमान पार्षद प्रीति जौहर के मुताबिक वार्ड में करीब सात करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से 30 लाख रुपये से छोटी लाइन से सफायर रोड तक सड़क का निर्माण, वाल्मीकि बस्ती में कम्युनिटी सेंटर, दो ट्यूबवेल, छोटी लाइन पर नाला कवर कराया, मटका चौक से गुरुनानक पुरा तक सड़क, हाउ¨सग बोर्ड कॉलोनी में 65 लाख रुपये से गलियों, नालियों व सड़कों का निर्माण शामिल है। कई कार्यों के एस्टीमेट बनाकर निगम को दिए हुए हैं, लेकिन टेंडर नहीं लग पाए। इनमें हाउस की बैठक में पास हुए 50-50 लाख रुपये कार्य भी शामिल हैं। इनसेट

ये समस्याएं जिनका समाधान जरूरी

वार्ड की कई कॉलोनियों में पानी की निकासी की व्यवस्था न होने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा छोटी लाइन सहित कई सड़कें टूटी पड़ी हैं। इनकी मरम्मत न होने से लोग परेशान हैं। गलियों व नालियों की नियमित रूप से सफाई नहीं होती। यहां तक कि हुडा सेक्टर-17 के लोग भी कई बार शिकायत कर चुके हैं। वार्ड में औद्योगिक इकाइयां होने के कारण प्रदूषण की समस्या भी है। इनमें से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी सीधे नालियों में छोड़ा जा रहा है। फोटो : 16

किसी भी जन प्रतिनिधि ने नहीं ली सुध

यशपाल का कहना है कि 1987 से यह कॉलोनी बसी हुई है। चार पार्षद यहां से बन चुके हैं, लेकिन आज तक रामनगर कॉलोनी में पानी की निकासी नहीं हो पाई है। बारिश के दिनों में पानी घरों में घुस जाता है। हर वर्ष नुकसान होता है। इसका समाधान जरूरी है। फोटो : 17

निकासी की व्यवस्था जरूरी

असलम का कहना है कि पानी से बचाव के लिए घरों के सामने दीवारें की हुई हैं। विधायक, पार्षद व अधिकारियों से कई बार बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समस्या ज्यों कि त्यों है। किसी भी जन प्रतिनिधि ने आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया। फोटो : 18

फैल सकती बीमारी

मोहन लाल का कहना है कि पानी की निकासी के लिए इंजन लगा हुआ है, इसका फायदा भी नहीं हो रहा है। नियमित रूप से सफाई न होने के कारण जगह-जगह गंदगी है। नालियां भी गंदगी से लबालब हैं। मक्खी व मच्छरों की भरमार है। ऐसे में बीमारियां फैलने की संभावना बनी रहती है। फोटो : 19

शिव कुमार का कहना है कि खाली पड़े प्लॉट परेशानी का कारण बन रहे हैं। निकासी न होने के कारण यहां पानी जमा रहता है। गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। हालात देखकर नहीं लगता कि वे शहर में रह रहे हैं। कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। निकासी न होना सबसे बड़ी समस्या है। फोटो : 20

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समान विकास कराया

हमने विकास कार्योँ में कोई कसर शेष नहीं छोड़ी। सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से वार्ड की सभी कॉलोनियों में समान विकास कार्य कराए। परवालों में एसटीपी चालू होने के बाद पानी की निकासी की समस्या भी दूर हो जाएगी। साफ-सफाई पर पूरा ध्यान है। इस बारे सफाई कर्मियों की सख्त हिदायत दी हुई है। टेंडर न लगने के कारण कुछ काम पें¨डग है। उम्मीद है वे भी जल्द हो जाएंगे।

प्रीति जौहर, निवर्तमान पार्षद।

Posted By: Jagran