'मौत मुझे बुला रही है, मरने के बाद मिट्टी पलीत न करना', यमुनानगर में रहस्यमय ढंग से लापता हुई नर्स
यमुनानगर से 43 वर्षीय नर्स मोनिका रानी एक रहस्यमय नोट छोड़कर लापता हो गई हैं। श्रीराम पार्क से उनके सामान ...और पढ़ें

मेरे मरने के बाद मिट्टी पलीत न करना, नोट छोड़कर लापता हुई नर्स।
HighLights
43 वर्षीय नर्स मोनिका रानी यमुनानगर से लापता
लापता होने से पहले छोड़ा रहस्यमय संदेश वाला नोट
श्रीराम पार्क में मिले उनके हैंडबैग और जूते
जागरण संवाददाता, यमुनानगर। न्यू आबादी कैंप से 43 वर्षीय महिला लापता हो गई। महिला नर्स है। उसकी तलाश शुरू की तो श्रीराम पार्क से उसका हैंड बैग, कपड़ों का बैग व स्पोर्ट्स जूते मिले। बैग से एक रजिस्टर मिला। उसमें उसने एक पन्ने पर नोट छोड़ा हुआ है।
उसमें उसने लिखा है कि उसे कई दिन से अजीब लग रहा था। जैसे मेरी मौत मुझे बुला रही थी। मेरे मरने के बाद मिट्टी पलीत न करना। गांधीनगर थाना पुलिस ने उसकी गुमशुदगी दर्ज की है। पुलिस को दी शिकायत में पवन कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी मोनिका रानी पिछले 15-20 दिनों से जगाधरी स्थित एक निजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के तौर पर रात की ड्यूटी कर रही थी।
सोमवार को वह दोपहर करीब 12 बजे ड्यूटी से घर आई थी। इसके बाद दोपहर दो बजे अस्पताल जाने की बात कहकर निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। मंगलवार रात करीब नौ बजे पवन अस्पताल पहुंचा और पत्नी के बारे में जानकारी ली। वहां पता चला कि मोनिका ड्यूटी पर नहीं आई थी।
इसके बाद उसकी तलाश की तो श्रीराम पार्क में उसका सामान मिला। हैंडबैग से आर्टिफिशियल ज्वेलरी, एक छोटा काला पर्स, इंजेक्शन, दवाइयां और अन्य सामान मिला। साथ ही एक रजिस्टर बरामद हुआ, जिसके पन्ने पर लिखे नोट से सामान की पहचान मोनिका के रूप में हुई।
रजिस्टर में लिखा परिवार के लिए संदेश
नोट में मोनिका ने लिखा कि वह अपने होशो-हवास में और बिना किसी दबाव के यह लिख रही है। उसे कई दिनों से अजीब महसूस हो रहा था और रक्षाबंधन से ऐसा लग रहा था, जैसे मौत उसे बुला रही हो।
उसने लिखा कि वह अपने पति पवन, तीन बेटों, सास और तीन ननद से मिले प्यार के लिए खुद को खुशनसीब मानती है। उसने परिवार के साथ बिताए 25 वर्षों को अच्छा बताया और अपने मायके के सदस्यों के स्नेह का भी जिक्र किया।
मोनिका ने पति से किसी गलती के लिए माफी मांगते हुए बच्चों को संभालने और प्यार से रखने की विनती की। उसने निशा की बेटियों को अपनी बेटियों की तरह प्यार देने की बात लिखी और दिवाश व समयरा को बुआ की कमी महसूस न होने देने का आग्रह किया। नोट में उसने स्पष्ट किया कि किसी के पैसे देने या लेने नहीं हैं। केवल अस्पताल से 16 दिन का वेतन लेना बाकी है।
