जागरण संवाददाता, कपालमोचन : मेला में आए श्रद्धालुओं को उपचार देने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से फेल रहा। मेला में उल्टी, दस्त, पेट दर्द से पीड़ित श्रद्धालुओं को उपचार के लिए बिलासपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन यहां पर उपचार करने के बजाय डॉक्टर सभी को सिविल अस्पताल जगाधरी या फिर ट्रामा सेंटर में रेफर करते रहे। इससे श्रद्धालुओं को उपचार कम लेकिन परेशानी ज्यादा मिली।

पंजाब समेत विभिन्न जगहों से आए श्रद्धालुओं को मेले में उल्टी, दस्त, उच्च रक्तचाप, बेचैनी समेत अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ा। जिन्हें एंबुलेंस की मदद से बिलासपुर के सीएचसी ले जाया गया। परंतु यहां पर उन्हें प्राथमिक उपचार देकर जगाधरी और यमुनानगर रेफर कर दिया गया। इन पीड़ितों के परिजनों को पहले यमुनानगर और उसके बाद कपाल मोचन के चक्कर काटने पड़े। जिससे उन्हें काफी प रेशानी झेलनी पड़ी।

खाने के बाद बदहवास हुआ दंपती

मेला में 60 साल के दंपती को किसी ने खाने में कोई नशीला पदार्थ खिला दिया। जिससे दोनों अपने होश खो बैठे। वे कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे। लोगों ने उन्हें सड़क किनारे पड़ा देखा तो पुलिस को सूचना दी। फिर उन्हें एंबुलेंस की मदद से बिलासपुर लाया गया जहां से उन्हें यमुनानगर रेफर कर दिया गया।

रविवार को ये मरीज पहुंचे अस्पताल

पंजाब के मोगा से आए योगी, बरनाला के नरेश कुमार, नगली के लाला राम, बरनाल के 65 वर्षीय अवतार सिंह, मोगा के 55 वर्षीय बलबीर सिंह, पंजाब के जाखल के 58 वर्षीय मंगल सिंह, मोगा की जोगिद्र कौर, लुधियाना के 63 वर्षीय रमेश, 64 वर्षीय जैलदार सिंह, दर्शना रानी, मुक्तसर से चार वर्षीय रूपिद्र कौर, लुधियाना की 59 वर्षीय भूपिद्र, मुक्सतर की 28 वर्षीय स्वाति, कालपी से राजिद्र सिंह को उल्टी, दस्त, बुखार, दौरा पड़ना, उच्च रक्तचाप, चक्कर, दिल घबराना, पेट दर्द, बेचैनी के चलते बिलासपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

Posted By: Jagran

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