शाही ठाट-बाट से रह रही हैं हरियाणा की 3 हथिनियां, लक्ष्मी और लिली को भा रही बाजरे की खिचड़ी और देसी घी
धर्मवीर, छछरौली के बनसंतौर स्थित चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में तीन हथिनियों लक्ष्मी-वन, लक्ष्मी-टू और लिली की विशेष देखभाल की जा रही है।

लक्ष्मी-वन, लक्ष्मी-टू और लिली को भा रही गुड़-चना और बाजरे की खिचड़ी।
HighLights
बनसंतौर केंद्र में लक्ष्मी-वन, लक्ष्मी-टू, लिली हथिनियों की देखभाल।
सर्दियों में गुड़-चना, बाजरे की खिचड़ी, गन्ना विशेष आहार।
इको-टूरिज्म के लिए बने ढांचे अब खंडहर में बदल रहे।
धर्मवीर, छछरौली। बनसंतौर स्थित चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में तीन हथिनियों की देखभाल के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। यहां लक्ष्मी-वन, लक्ष्मी-टू व लिली को मौसम के अनुसार पौष्टिक आहार दिया जाता है। गर्मियों में जहां हथिनियों की खुराक में हरा चारा, फल और खिचड़ी शामिल होती है। वहीं, सर्दियों में गुड़-चना, बाजरे की खिचड़ी, गन्ना और केले की शुरुआत हो चुकी है।
पति की याद में कराया था केंद्र का निर्माण
वर्ष 2007 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार में वन मंत्री रहीं किरण चौधरी ने अपने पति और दिवंगत कांग्रेस नेता चौधरी सुरेंद्र सिंह की स्मृति में करीब 400 एकड़ में फैले इस हाथी पुनर्वास केंद्र की स्थापना कराई थी। इसका उद्देश्य सर्कस और अन्य गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले व प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हाथियों को सुरक्षित आश्रय और बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना था।
वन एवं वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों से लक्ष्मी-वन, लक्ष्मी-टू, लिली, चंचल और मोती नाम की हथिनियों को यहां लाया गया था। चंचल व मोती की पिछले दिनों बुढ़ापे के कारण मृत्यु हो गई। अब केंद्र में तीन हथिनियां रह रही हैं। वर्तमान में किरण चौधरी भाजपा से राज्यसभा सदस्य हैं, जबकि उनकी बेटी श्रुति चौधरी हरियाणा सरकार में सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री हैं।
वन विभाग और संस्था संभालते जिम्मेदारी
लीलू राम ने बताया कि हथिनियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग निभाता है, जबकि वाइल्ड लाइफ एसओएस संस्था उनके खानपान और स्वास्थ्य की देखभाल करती है। विभाग की ओर से वन्यजीव रक्षक और दरोगा स्तर के कर्मचारी तैनात हैं। वहीं, संस्था की ओर से एक प्रबंधक, एक पशु चिकित्सक और चार महावत विशेष तौर पर देखभाल में जुटे रहते हैं।
गर्मियों में प्रतिदिन ढाई क्विंटल हरा चारा
निरीक्षक लीलू राम के अनुसार, गर्मियों में लक्ष्मी-वन, लक्ष्मी-टू और लिली को प्रतिदिन करीब ढाई क्विंटल हरा चारा, पांच किलोग्राम फल और छह किलोग्राम खिचड़ी दी जाती है। हथिनियों की उम्र और शारीरिक जरूरतों के अनुसार उनके भोजन का ध्यान रखा जाता है।
सर्दियों में गुड़-चना और बाजरे की खिचड़ी
मौसम बदलने के साथ हथिनियों की खुराक में भी बदलाव किया जाता है। सर्दियों में उन्हें गुड़-चना, देसी घी से तैयार बाजरे की खिचड़ी, गन्ना, केला और हरा चारा दिया जाता है। केंद्र में हथिनियों के नहाने के लिए अलग-अलग तालाब बनाए गए हैं। सर्दी से बचाव के लिए तीन शेड और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
इको टूरिज्म की योजना अधूरी, खंडहर बन रहे ढांचे
हाथी पुनर्वास केंद्र के आसपास पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ट्री हाउस, परगोला और लकड़ी-बांस से बनी हटों का निर्माण कराया गया था। योजना थी कि प्राकृतिक वातावरण में पर्यटकों को आकर्षित किया जाए और क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा मिले।
हालांकि, इन सुविधाओं में पर्यटन गतिविधियां शुरू नहीं हो पाईं। लंबे समय से उपयोग में नहीं आने और रखरखाव की कमी के कारण इन ढांचों की हालत खराब हो चुकी है। जिन सुविधाओं से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी, वे अब कबाड़ और खंडहर का रूप लेती जा रही हैं।
संरक्षण के साथ पर्यटन पर भी ध्यान देने की जरूरत
हाथी पुनर्वास केंद्र में हथिनियों की देखभाल वन्यजीव संरक्षण की महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि, इसके साथ पर्यटन के लिए तैयार की गई सुविधाओं की सुध लेना भी जरूरी है। ट्री हाउस, परगोला और हटों की मरम्मत कराकर तथा जरूरी अनुमति और प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करके इन्हें उपयोग में लाया जा सकता है।
इससे क्षेत्र में प्रकृति पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। फिलहाल केंद्र में एक ओर हथिनियों की देखभाल की व्यवस्था जारी है। वहीं, इको टूरिज्म के लिए तैयार ढांचे अपनी उपयोगिता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
